Jharkhand: इतिहासकारों ने आदिवासियों की उपेक्षा की, व्यवस्था ने चुप कराया: हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड आदिवासी महोत्सव में बुधवार को कहा कि आज जब आदिवासी अपनी पहचान के लिए इतिहास में की गई उपेक्षा के खिलाफ बोलने का प्रयास कर रहा है तो उसे चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है। भले ही आदिवासियों में अनेक क्रांतिकारी वीर, विद्वान, चिंतक हुए, लेकिन समाज की मुख्य धारा की ओर से हमेशा प्रयास किया गया है कि हमारी कोई औकात नहीं बन सके और नीति-निर्धारण में हमारी कोई भूमिका नहीं रह सके।

सीएम ने कहा कि आदिवासी समाज को आदिवासी विचारक, लेखक, विद्वान की नजरों से देखने की जरूरत है। यह सच है कि आज भी देश का सबसे गरीब, अशिक्षित, प्रताड़ित, विस्थापित एवं शोषित वर्ग-आदिवासी वर्ग है, लेकिन यह भी सच है कि हम एक महान सभ्यता के वारिस हैं, हमारे पास विश्व मानव समाज को देने के लिए बहुत कुछ है। जरूरत है कि नीति निर्माताओं के पास दृष्टि हो। सीएम ने कहा कि लाखों लोगों को अपनी भाषा से, अपनी संस्कृति से, अपनी जड़ों से काट दिया गया है।

Hemant Soren,
कल का किसान आज मजदूर बनकर रह गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल का किसान आज वहां साइकिल पर कोयला बेचने को मजबूर है। बड़े-बड़े शहरों में जाकर बर्तन धोने, बच्चे पालने या ईंट भट्ठों में बंधुआ मजदूरी करने के लिए विवश किया गया है। बिना पुनर्वास किये एक्ट बनाकर लाखों एकड़ जमीन कोयला कम्पनियों को दिया गया। हमारा झरिया शहर बरसों से आग की भट्ठी पर तप रहा है, लेकिन कोयला कम्पनियां एवं केंद्र कान में तेल डालकर सोयी हुई है।

कार्यक्रम में कल्याण विभाग के मंत्री चंपई सोरेन, विधायक विनोद सिंह, विधायक जय मंगल सिंह, विधायक राजेश कच्छप, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, डीजीपी अजय सिंह, प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, सीएम की प्रधान सचिव वंदना दादेल और सीएम के सचिव विनय चौबे मौजूद थे।

शिबू सोरेन ने आदिवासी बच्चों की शिक्षा पर दिया जोर
राज्य समन्वय समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन ने झारखंड आदिवासी महोत्सव 2023 के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सभी आदिवासी समुदाय की संस्कृति एक जैसी है।

आदिवासियों से आग्रह है कि वे अपने बच्चे-बच्चियों को शिक्षित जरूर करें। जब बच्चे शिक्षित होंगे तभी आदिवासी समुदाय उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी महोत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह महोत्सव आदिवासी समुदाय की एकजुटता और आपसी भाईचारा को दर्शाता है। आने वाली पीढ़ी भी इसी तरह अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी रहे। इसके लिए उन्हें प्रेरित करने की आवश्यकता है।

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