तेलंगाना के कपास के खेतों में जबरदस्त संभावनाएं: एक्सपर्ट
विशेषज्ञों के मुताबिक तेलंगाना के कपास के खेतों में जबरदस्त संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य की उत्पादकता में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अहम सुझाव दिए। उनके मुताबिक ये सुनिश्चित करना चाहिए कि कपास उत्पादक अपनी प्रगति जारी रखें।
वहीं कपास के पौधों का घनत्व काफी बढ़ गया है, जिससे संभावित रूप से संख्या चौगुनी होकर 26,000 पौधे प्रति एकड़ हो गई है। ये दृष्टिकोण कपास के उत्पादन और समग्र उत्पादकता दोनों को अनुमानित 30-40 प्रतिशत तक बढ़ाने की क्षमता रखता है। ये 450 किलोग्राम/हेक्टेयर की वर्तमान लिंट उपज से 750 किलोग्राम/हेक्टेयर की आशाजनक वृद्धि को दर्शाता है।

तेलंगाना की कृषि जीडीपी में कपास का महत्वपूर्ण स्थान है, जिसका योगदान 43 प्रतिशत है। विविध परियोजनाओं के जल संसाधनों द्वारा सक्षम प्रभावी सिंचाई प्रणाली इसे और बढ़ा रही है।
रासी सीड्स के अध्यक्ष एम रामासामी ने राज्य के कपास उद्योग में क्रांति लाने में एचडीपीएस के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसानों को सशक्त बनाना हमारा लक्ष्य है।
वहीं अंतर्राष्ट्रीय कपास विशेषज्ञ डॉ. कैटर हेक ने कहा कि जैसे-जैसे कृषि परिदृश्य विकसित हो रहा है, कपास उत्पादकता में भारत की उल्लेखनीय प्रगति सामने आ रही है। अत्याधुनिक वैज्ञानिक सफलताओं को अपनाना अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, जो हमें पैदावार बढ़ाने और हमारे किसानों की आजीविका में सुधार करने का अवसर प्रदान करती है।












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