झारखंड-मंत्रिमंडल से निष्कासित होंगे तीन कांग्रेसी मंत्री, हेमंत के पसंदीदा चेहरे होंगे शामिल

झारखंड मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को देखते हुए कांग्रेस कोटे के मंत्री अभी से ही बदले-बदले नजर आ रहे हैं। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस कोटे के मंत्री आलमगीर आलम को छोड़कर अन्य तीन मंत्रियों रामेश्वर उरांव, ब

रांची, 05 अगस्त। झारखंड मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को देखते हुए कांग्रेस कोटे के मंत्री अभी से ही बदले-बदले नजर आ रहे हैं। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस कोटे के मंत्री आलमगीर आलम को छोड़कर अन्य तीन मंत्रियों रामेश्वर उरांव, बन्ना गुप्ता और बादल पत्रलेख की सक्रियता कम देखी जा रही है। इसका असर पार्टी के विधायकों पर भी पड़ा है। विधायकों का बाडी लैंग्वेज भी ढ़ीला-ढ़ाला है। विधानसभा सत्र के दौरान अमूमन विधायक आपस में मेलजोल, हंसी-मजाक के साथ-साथ एक साथ दोपहर का भोजन लेते हैं, लेकिन कांग्रेस के विधायक अनमने तरीके से सदन की कार्यवाही में भाग लेते दिख रहे हैं।

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पहले विधानसभा में विपक्ष के शोरगुल और हल्ला-हंगामे के बीच कांग्रेस के विधायक भी दखलंदाजी करने को आगे आते थे। लेकिन अभी वे उदासीन हैं। वे अलग-थलग और अकेले दिखाई पड़ रहे हैं। यही नहीं, एक-दूसरे से समन्वय भी नहीं हो पा रहा है। ऐसा लगता है कि विधायक सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। इसे सत्ता पक्ष में बैठने वाले तीन कांग्रेस विधायकों की बंगाल में गिरफ्तारी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पार्टी के ही विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह द्वारा इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराए जाने से विधायक दो फांड हो गए हैं। विधायकों के एक धड़े ने इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन विक्सल कोंगाड़ी को पार्टी से सस्पेंड करने का विरोध किया है।

शिकायत पार्टी विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर से की गई है। पार्टी के भितरखाने कलह बढ़ता देखकर विधायक परेशान हैं और वे खुद को अधिकाधिक रिजर्व रख रहे हैं। हालांकि कोई इसपर बोलने को सामने नहीं आ रहा है। कुछ विधायक दबे मुंह यह अवश्य कह रहे हैं कि विधायकों को सस्पेंड करने में जल्दबाजी दिखाई गई। इससे नेतृत्व को परहेज करना चाहिए था। साथी विधायक द्वारा ही प्राथमिकी दर्ज कराए जाने से भी गलत संदेश गया है। मंत्रिमंडल फेरबदल का सर्वाधिक असर कांग्रेस पर पड़ने की संभावना है। बताया जाता है कि चार में से तीन मंत्रियों को ड्राप कर नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पसंदीदा विधायकों को प्राथमिकता मिलेगी। मंत्रिमंडल में झामुमो कोटे से भी एक विधायक को भी मंत्री पद दिए जाने की संभावना है। विधानसभा के मानसून सत्र के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा सकता है।

राज्य सरकार के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में फेरबदल से जुड़े सवाल पर कहा कि वह 17 वर्षों से कांग्रेस में हैं। उन्हें न तो खोने का डर है, न ही पाने की लालसा है। पार्टी के हालिया घटनाक्रम से वह दुखी हैं। ऐसी बातों को मिल- बैठकर सुलझाने की जरूरत है। अब मुकदमा दर्ज हो गया है तो जल्द दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी विपक्ष ने प्रयास किया था, तब उन्होंने विपक्ष को चेतावनी दी थी। इससे मामला एक साल तक शांत रहा।

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