तेलंगाना: केंद्रीय नेतृत्व के हाई-प्रोफाइल प्रचार अभियान के बावजूद भी बीजेपी चिंतित, नहीं मिला रहा जनाधार
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन बचे हैं। कल प्रचार अभियान थम जाएगा। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) धुआंधार प्रचार कर रही है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किए गए हाई-प्रोफाइल प्रचार अभियान के बावजूद भी उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं मिला। इससे तेलंगाना बीजेपी के नेता और पदाधिकारी चिंतित हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय योजनाओं को अपने अभियान के मुख्य आधार के रूप में अपनाने और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी करने के नेतृत्व के फैसले ने मतदाताओं को उससे दूर कर दिया है।

जमीनी स्तर पर काम करने वाले भाजपा पदाधिकारी चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय योजनाओं पर नेतृत्व की अत्यधिक निर्भरता और निर्वाचन क्षेत्रों या जिलों से संबंधित स्थानीय मुद्दों को नहीं छूने से चिंतित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित राज्य में प्रचार कर रहे अधिकांश भाजपा नेता पिछड़े वर्ग के नेता को मुख्यमंत्री बनाने, बीआरएस सरकार के कुशासन, मुसलमानों को दिए जा रहे चार प्रतिशत आरक्षण को समाप्त करने जैसे मुद्दों तक ही सीमित रहे।
सूत्रों ने कहा कि भाजपा नेतृत्व द्वारा उठाए गए मुद्दे मतदाताओं को आकर्षित नहीं कर रहे हैं, क्योंकि अन्य दल उन्हें कई योजनाएं और मुफ्त सुविधाएं दे रहे हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी चिंतित हैं क्योंकि भाजपा उम्मीदवारों को लोगों को पार्टी की बहुप्रचारित "डबल इंजन" सरकार के लाभों को समझाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
यहां तक कि राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड और केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना से भी भगवा पार्टी को कोई समर्थन नहीं मिल पा रहा है। दरअसल, अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के बीच बीजेपी की खराब उपस्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का कारण रही है। राज्य में दोनों समुदायों के पास 31 आरक्षित सीटें हैं।
यह भी पढ़ें- VIDEO: 'बाय-बाय केसीआर...', तेलंगाना में राहुल गांधी ने रैली के दौरान मुख्यमंत्री पर कसा तंज












Click it and Unblock the Notifications