कुरुक्षेत्र में 500 करोड़ की लागत से बनने जा रहा श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय: राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय
सोनीपत, 12 जुलाई। आयुर्वेद आज पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है। मानव जाति से पहले ही इसकी उत्पति तो हो चुकी थी, लेकिन बाद में ऋषि-मुनियों ने जुड़ी-बूटियों के माध्यम से इसे एक पद्धति के रूप में विकसित किया। यह बातें राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कही। वह गांव आनंदपुर झरोठ में पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल के पैतृक घर में 56 लाख रुपये से बनकर तैयार हुए लाला खेमचंद चरती लाल गोयल राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय का उद्घाटन करने पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आयुष को नया आयाम दे रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में प्रदेश सरकार भी आयुर्वेद के क्षेत्र में बेहतर काम कर रही है। कुरुक्षेत्र में पांच सौ करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए पांचों विधाओं को एकसाथ लेकर चलने वाले श्रीकृष्णा विश्वविद्यालय की स्थापना सौ एकड़ में की जा रही है। इस अवसर पर गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि आयुर्वेद को पांचवें वेद के रूप में जाना जाता है। यह धरती की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति है। प्रदेश सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देते हुए नागरिक अस्पतालों से लेकर सीएचसी व पीएचसी स्तर पर भी एक आयुर्वेदिक चिकित्सकों की नियुक्ति करने जा रही है। वहीं हर गांव में एक योगशाला खोलकर सुबह-शाम योग करवाने के साथ ही दिन में इन्हें वेलनेस सेंटर के रूप में प्रयोग किया जाएगा। प्रदेश के एक हजार गांवों में इन्हें स्थापित भी किया जा चुका है।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री विजय गोयल ने कहा कि उनके स्वतंत्रता सेनानी दादा ने जंग में गोलियां खाई थीं। वहीं उनके पिता ने कराधान के सबसे बड़े वकील के रूप में दिल्ली में पहचान बनाने के साथ ही राजनीति में भी नाम कमाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 175 देशों में योग को पहचान दिलाई, उनका योगदान कभी इस क्षेत्र में भुलाया नहीं जा सकता है। विजय गोयल ने गांव आनंदपुर झरोठ में अपने पैतृक घर को औषधालय बनाने के लिए दान किया है। औषधालय का नाम उनके पिता के नाम पर रखा गया है।












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