हरियाणा में 76 लाख उपभोक्ताओं को राहत, CM खट्टर का बड़ा फैसला

किसानों के लिए बिजली की दरें 10 पैसे प्रति यूनिट ही रहेंगी। बिजली की दरों में कटौती और बढ़ोतरी करने के अधिकार एचईआरसी के पास ही हैं।

Relief to 76 lakh consumers in Haryana, CM Khattars big decision

हरियाणा के 76 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। सरकार ने बिजली की दरों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की है। पहले से चली आ रही दरें ही इस साल भी लागू रहेंगी। हरियाणा राज्य बिजली विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने टैरिफ जारी कर दिया है। इतना ही नहीं, कृषि उपभोक्ताओं को भी पहले की तरह सब्सिडी जारी रहेगी।

किसानों के लिए बिजली की दरें 10 पैसे प्रति यूनिट ही रहेंगी। बिजली की दरों में कटौती और बढ़ोतरी करने के अधिकार एचईआरसी के पास ही हैं। सरकार का एचईआरसी पर किसी तरह का कंट्रोल नहीं है, लेकिन बिजली कंपनियों की ओर से रेट बढ़ाने को लेकर आयोग के सामने दावा प्रस्तुत किया जाता है। बताते हैं कि इस बार सरकार ने इस तरह का कोई दावा ही नहीं रखा। बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं करने को आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार इस मामले पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होने देना चाहती। दरअसल, नयी दिल्ली के बाद आम आदमी पार्टी पंजाब में भी 300 यूनिट तक बिजली माफ कर चुकी है। हरियाणा के पूर्व सीएम व विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी ऐलान कर चुके हैं कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 300 यूनिट माफ की जाएगी।

लाइन लॉस 25 से घटकर 13.43 प्रतिशत आया
हरियाणा ऐसा राज्य है, जहां बिजली बिलों को लेकर सरकारें बनती और गिरती रही हैं। ऐसे में मौजूदा भाजपा सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं नज़र आ रही। रेट नहीं बढ़ाने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि प्रदेश में लाइन लॉस 25 प्रतिशत से घटकर 13.43 प्रतिशत रह गया है। बिजली कंपनियां भी अब घाटे की बजाय मुनाफे में हैं। सो, सरकार ने उपभोक्ताओं पर बोझ डालने की बजाय पुरानी ही दरों को लागू रखने का निर्णय लिया है।

8 साल में प्रदेश में अभूतपूर्व बिजली सुधार : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विगत 8 वर्षों में हरियाणा में अभूतपूर्व बिजली सुधार किए गये हैं। बिजली सुधारों की केंद्रीय बिजली मंत्री राज कुमार सिंह ने भी सराहना की है और केंद्रीय दल ने हरियाणा का अध्ययन भी किया है। इसी के फलस्वरूप लाइन लॉसिस को कम करने पर फोकस किया है। लाइन लॉस 13.43 प्रतिशत रह गया है, जो कांग्रेस के समय में 25 से 30 प्रतिशत तक था। सरकार ने उपभोक्ताओं को नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता प्रबंध किए हैं। उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

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