पराली जलाने की घटनाओं में इस साल आएगी 50 फीसदी तक कमी, Punjab Govt ने किया ये बड़ा दावा
Punjab Govt: पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक्शन प्लान बनाया है। इस प्लान के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाओं में 50 फीसदी तक कमी लाने का टारगेट रखा है।
मान सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को सौंपे गए एक्शन प्लान में इस बात का दावा किया है। आपको बताते चले कि पंजाब और हरियाणा सहित छह राज्यों में धान की फसल के बाद उसके अवशेष को खेत में ही जलाने का चलन है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब के खेतों में काफी बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती है। पराली जलाने से सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर की हवा दमघोंटू हो जाती है। दिल्ली-एनसीआर की हवा दमघोंटू ना हो इसलिए पहले से ही प्रसाय शुरू कर दिए जाते हैं।
आपको बता दें कि दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा दमघोंटू ना इसलिए पंजाब में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। ऐसा बताया जा रहा है कि सीएक्यूएम अब तक पंजाब के अधिकारियों के साथ इस संबंध में चार बैठक कर चुका है। इस बैठक में पंजाब सरकार की ओर से पराली जलाने से रोकने के लिए अपना एक्शन प्लान दे दिया गया है।
पंजाब सरकार द्वारा दिए गए एक्शन प्लान में ऐसा दावा किया गया है कि इस साल पिछले साल की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में 50 फीसदी तक कमी आएंगी। वहीं, होशियारपुर, मलेरकोटला, पठानकोट, रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली), एसबीएस नगर में पराली जलाने के मामले समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
सीएक्यूएम के मुताबिक, इस सीजन में पंजाब में कुल दो करोड़ टन पराली निकलने का अनुमान है। इसमें 33 मीट्रिक टन बासमती धान की पराली भी शामिल है। करीब डेढ़ करोड़ टन पराली के प्रबंधन के लिए कारगर एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें पराली के अलग-अलग प्रयोग शामिल है।
फिलहाल, पंजाब राज्य में पराली प्रबंधन के लिए एक लाख 17 हजार 672 सीआरएम मशीन हैं, जबकि 23 हजार मशीन और लाई जा रही हैं। बता दें कि पिछले वर्ष पंजाब के सिर्फ 5 जिलों में ही 44 प्रतिशत पराली जलाई गई थी।












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