पंजाब: सीएम मान ने मुख्तार अंसारी मामले में पेश किया लेटर, रंधावा और कैप्टन पर किया तीखा हमला

Punjab CM

जालंधर: पूर्व की कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में एडवोकेट जनरल अतुल नंदा और चीफ प्रिंसिपल सचिव सुरेश कुमार के मध्य चले टकराव की आंच अब कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को तपिश देने लगी है। मामला गैंगस्टर मुख्तार अंसारी का है।

एक दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा मुख्य सचिव के साथ पत्राचार में ये बात कही गई है कि मुख्तार अंसारी के मामले का बचाव करने के लिए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे की नियुक्ति की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि इसमें कोई सार्वजनिक हित या पंजाब राज्य का हित शामिल नहीं था। पत्र में ये भी कहा गया है कि कैप्टन और रंधावा दोनों ने ही निजी वकील दवे की नियुक्ति का अनुमोदन किया था इसलिए 55 लाख रुपए दोनों से ही वसूले जा सकते हैं। इस संबंध में सी.एम. मान ने ट्वीट भी किया।

वैसे तो मुख्तार अंसारी का विवाद आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद हुए दूसरे विधानसभा सत्र में ही गूंज गया था जब तत्कालीन जेल मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सदन में आरोप जड़ दिए थे कि पूर्व की कांग्रेस सरकार ने गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी को बचाने के लिए सरकारी खजाने पर 55 लाख रुपये खर्च का बोझ डाला। एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कहा कि 55 लाख रुपये कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा से वसूले जाएंगे।

इधर आज पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके सारा नजला पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर झाड़ा और कहा कि अंसारी के लिए निजी वकील की अनुमति गृह विभाग ने दी थी और गृह विभाग तब कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास था। उन्होंने ये बात भी कही कि वे तो राज्य के तत्कालीन एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के लिए कह रहे थे पर मुख्यमंत्री कार्यालय की लड़ाई में वे नहीं माने और तत्कालीन गृह विभाग ने ही सरकार को अंसारी के लिए निजी वकील नियुक्त करने की अनुमति दी।

इधर 1 जुलाई को मुख्यमंत्री द्वारा मुख्य सचिव को लिखे सरकारी पत्र में कहा गया है कि उन्होंने पूर्वगामी कार्यालय नोट्स का अवलोकन किया जैसा कि सी.एस. ने एन.पी/106 (पूर्व) में अपने नोट में प्रस्तावित किया था, मुख्तार अंसारी के मामले का बचाव करने के लिए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे की नियुक्ति की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि इसमें कोई सार्वजनिक हित या पंजाब राज्य का हित शामिल नहीं था। इसलिए पंजाब राज्य के सार्वजनिक धन का उपयोग ऐसे व्यय के लिए नहीं किया जा सकता है।

जैसा कि एन.पी/106 (पूर्व) में पैरा 11 में प्रस्तावित है कि, यह व्यय गृह मामलों और न्याय विभाग द्वारा 06-10-2017 के पत्र के माध्यम से जारी निर्देशों के अनुसार निर्धारित किया जाना है। जैसा कि नियुक्ति के संबंध में 03-02-2021 के आदेश में दुष्यंत दवे, वरिष्ठ अधिवक्ता का उल्लिखित है। इस प्रकार किया गया व्यय पूर्व जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों से समान रूप से वसूला जा सकता है क्योंकि उन्होंने इस मामले के लिए एक वकील के रूप में दुष्यंत दवे को शामिल करने का प्रस्ताव और अनुमोदन किया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+