राजस्थान की राजनीति : क्या सीएम अशोक गहलोत-सचिन पायलट के बीच जारी है सियासी कलह?

राजस्थान की राजनीति : क्या सीएम अशोक गहलोत-सचिन पायलट के बीच जारी है सियासी कलह?

जयपुर, 10 जुलाई। राजस्थान में लंबे समय से जारी सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। सीएम गहलोत गाहे-बगाहे पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट पर हमला करते रहे हैं। लेकिन सचिन पायलट सधी हुई रणनीति के तहत बेहद खामोशी से सब कुछ सहन कर रहे हैं।

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सचिन पायलट पार्टी आलाकमान के सामने ऐसी छवि बना रहे है कि जिससे कांग्रेस आलाकमान को हमेशा ये महसूस हो कि पायलट सबकुछ पार्टी में लगा रहा है। सचिन पायलट को उम्मीद है कि राजस्थान में देर सवेर आने वाला कल उनका ही होगा। वैसे भी सीएम गहलोत की मुख्यमंत्री के तौर पर अंतिम पारी मानी जा रही है। सीएम गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सचिन पायलट के धैर्य की तारीफ कर संकेत दिया है कि सचिन पायलट भविष्य में पार्टी आलाकमान की पंसद बन रहे हैं।

सचिन पायलट के पास विकल्प बहुत कम

जानकारों का कहना है कि बगावत के बाद सचिन पायलट के पास विकल्प बहुत कम बचे हैं। पायलट क्षेत्रीय दल की नींव नहीं डालेंगे। क्योंकि वह जानते हैं कि राजस्थान की जमीन किसी तीसरे दल के लिए कभी उपजाऊ नहीं रही है। रास्ता बहुत तंग रह गया है। पायलट यह बात जानते है कि बीजेपी में पहले से ही बड़े नेता मौजूद है। उनकी स्वीकार्यता जो कांग्रेस में है वैसी नहीं होगी। ऐसे में पायलट के सामने सम्मानजनक रास्ता सिर्फ कांग्रेस में बचा है।

जानकारों का कहना है कि सचिन पायलट अब हड़बड़ाहट में कोई कदम नहीं उठाना चाहते हैं। वजह साफ है। 11 जुलाई 2020 को सचिन पायलट कैंप की बगावत। सचिन पायलट 19 विधायकों का ही समर्थन जुटा पाए। जबकि पायलट कैंप ने 30 विधायकों का दावा किया था। गहलोत कैंप पायलट कैंप पर भारी पड़ गया। सीएम अशोक गहलोत अपनी सरकार बचाने में सफल हो गए। सचिन पायलट को गुट का सुलह करनी पड़ गई।

पायलट को मिल रही रही तवज्जो

पार्टी आलाकमान ने बगावत के बाद सचिन पायलट की हर बात को तवज्जो दी है। कैबिनेट फेरबदल से लेकर राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट कैंप के विधायकों एवं समर्थकों को एडजस्ट किया गया है। राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट कैंप के समर्थकों को प्रमुखता मिली है। जबकि कैबिनेट फेरदबदल में पायलट समर्थक विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीना और मुरारी मीना को मंत्री बनाया गया है। विभागों को बंटवारे में भी पायलट की बात का ध्यान रखा गया। सचिन पायलट पंचायतीराज मंत्री का विभाग भी अपने समर्थक रमेश मीना को दिलवाने में सफल रहे हैं। कैबिनेट से बर्खास्तगी के पहले यह विभाग पायलट के पास ही था।

लंबे समय से जारी है गहलोत- पायलट में सियासी जंग

राजस्थान कांग्रेस में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे समय से सियासी जंग चल रही है। यह जंग विधानसभा चुनाव 2018 से पहले शुरू हो गई थी। उस वक्त प्रत्याशी चयन में संगठन से अधिक व्यक्तिगत निष्ठा को परखकर उम्मीदवारी का फैसला करने जैसी बातें होती रही। विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार में सीएम गहलोतऔर सचिन पायलट के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आ गई थी।

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