ओडिशा सरकार ने विचाराधीन कैदियों पर ट्रैकिंग डिवाइस लगाने की बनाई योजना

Bhubaneswar News: ओडिशा की जेलों में कैदियों की संख्या कम करने के लिए डीजी (जेल) मनोज कुमार छाबड़ा ने सरकार को एक प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, गैर-जघन्य आरोपों का सामना कर रहे विचाराधीन कैदियों को अब जेल में नहीं बल्कि घरों में ही कैद करके रखा जाएगा।

इसके लिए कैदियों के शरीर पर जीपीएस डिवाइस फिट की जाएगी, जिससे उनकी निगरानी की जा सके। विचाराधीन कैदियों पर जीपीएस-सक्षम ट्रैकिंग डिवाइस लगाकर उनकी निगरानी करने वाला ओडिशा पहला राज्य बन जाएगा। नवीन पटनायक सरकार ने कहा कि ऐसा कदम उठाने के पीछे मकसद विचाराधीन कैदियों को नजरबंद करने की अनुमति देकर जेल की भीड़ को कम करना है।

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इस पहल से जहां जेलों में भीड़ कम होगी वहीं सरकार का कैदियों पर होने वाला खर्च भी बचेगा। इस तरह की डिवाइस का प्रयोग यूएस में हो रहा है। डीसी जेल मनोज कुमार छाबड़ा ने कहा, भारत में जेलों में सबसे बड़ी समस्या क्षमता से अधिक कैदियों की है। हालांकि ओडिशा में समस्या उतनी गंभीर नहीं है, लेकिन कुछ जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं। 80 प्रतिशत कैदी विचाराधीन कैदी हैं जिन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

कानून के अनुसार, वे अपराधी नहीं हैं और हम उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं कर सकते। कई बार तो वे सालों-साल जेलों में बंद रहते हैं, इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि विचाराधीन कैदी अपने घरों में, समाज में रहें। इसलिए हम इन विचाराधीन कैदियों के लिए एक ट्रैकर या निगरानी उपकरण के बारे में सोच रहे हैं।

छाबड़ा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय और निर्देश भी है कि जहां अपराध के लिए कारावास की अवधि 7 साल से कम है, वहां व्यक्ति को विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हमने सोचा कि क्यों न इस जटिल समस्या को हल करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए? उन्नत पश्चिमी देशों में कई प्रकार के ट्रैकर्स और मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है।

इसका फायदा यह है कि जेल के अंदर रहे बिना भी व्यक्ति की निगरानी कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा की जाती है। इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि आरोपियों पर लगाया जाने वाला डिवाइस एक निर्दिष्ट क्षेत्र या परिधि प्रोग्राम की जाएगी। अगर विचाराधीन व्यक्ति अधिकृत सीमाओं से परे कदम रखता है तो यह पुलिस को तुरंत सचेत करेगी। जिसके परिणामस्वरूप आरोपी की जमानत रद्द हो जाएगी और उसे जेल भेजा जाएगा।

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