जानिए छात्रों के लिए 'स्थानीय-से-स्थानीय' शिक्षा रणनीति ने कैसे काम किया
भुवनेश्वर, 21 अप्रैल: कोरोना महामारी के चलते टिकाबाली ब्लॉक का कटिमाहा गांव के प्राथमिक विद्यालय बंद हो गया। जिसके चलते दस वर्षीय आभा को अपनी दिनचर्या से छुट्टी मिल गई। स्कूल के बंद होने से शुरुआत में आभा खुश हुई। लेकिन उसे नहीं पता था कि, उसका ये अवकाश इतना लंबा होने वाला है। जिसकी उसने न तो अपेक्षा की थी और न ही चाही थी। कोरोना के चलते उसके घर की आर्थिक स्थिति पर तो असर हुआ ही साथ ही साथ वह घर के कामों की हेल्पर बन गई।

कोरोना के चलते बच्चों की रूकी पढ़ाई को शुर करने के लिए ओडिशा सरकार ने घर से सीखने की सुविधा के लिए ऑनलाइन शिक्षा पहल शुरू की। शिक्षा संजोग कार्यक्रम, एक व्हाट्सएप-आधारित डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, साथ ही साथ रेडियो कक्षाएं और YouTube लाइव स्ट्रीमिंग को बच्चों को उनकी शिक्षा से जोड़े रखने का काम किया है। 2020 के मध्य अगस्त में ट्रस्ट और उसके सहयोगियों ने 17 जिलों में 4,364 छात्रों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं प्रदान करने के लिए एक पायलट कार्यक्रम, मिशन 3-5-8, एक अभियान चलाया।
आत्मशक्ति के कार्यकारी ट्रस्टी रुचि कश्यप ने कहा, "इस अभियान के परिणाम उत्साहजनक थे, क्योंकि बच्चे उपचारात्मक कक्षाएं लेने के बाद अकादमिक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे।" "इसने हमें और अधिक करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद हमने इन ग्रामीण बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने की पहल शुरू की।
ओडिशा श्रमजीवी मंच के संयोजक अंजन प्रधान के अनुसार, कार्यक्रम ने 17 जिलों के 84 ब्लॉकों में फैला और ग्रामीण ओडिशा के 1 लाख छात्रों को इसके दायरे में शामिल किया। उन्होंने कहा, "यह एक जमीनी पहल है जो स्कूल बंद होने के खिलाफ एक समाधान के रूप में उभरी है और यह सुनिश्चित करती है कि बच्चे अपनी शिक्षा से बहुत दूर न हों।












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