झारखंड: 13 जिलों में शिक्षकों की भर्ती पर SC ने भी बरकरार रखा हाईकोर्ट का फैसला, कही यह बात
झारखंड: 13 जिलों में शिक्षकों की भर्ती पर SC ने भी बरकरार रखा हाईकोर्ट का फैसला, कही यह बात
नई दिल्ली, 03 अगस्त: झारखंड में शिक्षक भर्ती के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरक्षण की वजह से शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता है। दरअसल झारखंड सरकार ने 13 अनुसूचित जिलों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के सभी पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिए थे। इसके बाद गैरअनुसूचित जनजाति के लोगों ने झारखंड हाई कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

झारखंड हाई कोर्ट ने सितंबर 2020 में राज्य सरकार के 2016 के आदेश पर रोक लगा दी थी। बता दें कि जिलों की इस सूची में रांची का भी नाम था। जस्टिस एमआर शाह और बीवी नागरत्ना वाली हाई कोर्ट की बेंच ने आदेश दिया था कि ज्यादा मेरिट वालें शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगाकर स्कूल जाने वाले बच्चों की शिक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने यह नहीं कहा था कि नए सिरे से भर्ती की जाए बल्कि कोर्ट ने कहा था कि मेरिट लिस्ट फिर से बनाई जाए और अनुसूचित जाति वाले जिलों और अन्य जिलों में आदिवासी और गैर आदिवासी शिक्षकों की भर्ती की जाए। यह भर्ती पुरानी कटऑफ लिस्ट के हिसाब से ही करने के निर्देश दिए गए थे। हाई कोर्ट ने यह आदेश सुनाते हुए आर्टिक 142 के अधिकार का प्रयोग किया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर जो भर्तियां हो गई हैं उनको बरकरार नहीं रखा जाएगा तो झारखंड के हजारों स्कूल बिना शिक्षक के हो जाएंगे और अंततः इसका दुष्परिणाम सिर्फ छात्रों को भुगतना पड़ेगा।
सरकार ने क्या तर्क दिया था?
राज्य सरकार ने इस आदेश के पीछे तर्क रखा था कि अगर आदिवासी बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके स्थानीय लोगों का ही चयन किया जाएगा तो भाषा समझने में आसानी होगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, यह बात छोटी कक्षाओं के लिए तो समझ में आती है लेकिन यह सिद्धांत अन्य कक्षाओं पर लागू नहीं किया जा सकता। 5वीं से ऊपर किसी भी भाषा में बच्चों को सिखाया जा सकता है।












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