झारखंड के मंत्री आलमगीर बोले-देश के कोने-कोने में मिलेगी पहचान

झारखंड की उपराजधानी दुमका के गांधी मैदान में 10 दिवसीय पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला का उद्घाटन राज्य के मंत्री आलमगीर आलम एवं मंत्री बादल पत्रलेख के अलावा दुमका विधायक बसंत सोरेन एवं अन्य द्वारा किया गया।

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रांची,12 दिसंबर: झारखंड की उपराजधानी दुमका के गांधी मैदान में 10 दिवसीय पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला का उद्घाटन राज्य के मंत्री आलमगीर आलम एवं मंत्री बादल पत्रलेख के अलावा दुमका विधायक बसंत सोरेन एवं अन्य द्वारा किया गया। आगामी 20 दिसंबर तक आयोजित होने वाले इस सरस मेले में विभिन्न राज्यों के अलावा झारखंड के लगभग सभी जिले से पहुंचे महिला समूह द्वारा स्टॉल लगाकर अपने उत्पाद की प्रदर्शनी सह बिक्री की जा रही है।

मेले के उद्घाटन के अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि यह सरस मेला स्थानीय महिलाओं द्वारा उत्पादित की गयी वस्तुओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की है। जिस प्रकार डेयरी प्रोडक्ट और पापड़ से महिलाओं के समूह ने अपनी पहचान देश-दुनिया में स्थापित की है, वही पहचान झारखंड की महिलाओं द्वारा तैयार प्रोडक्ट को हिंदुस्तान के कोने-कोने में पहुंचा कर बनायी जायेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी कोशिश है कि ग्रामीण महिलाओं खासकर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों के आजीविका में वृद्धि की जाए. उनकी आय वृद्धि तथा सशक्तीकरण के लिए यह सरस मेला बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस मिशन का एकमात्र मकसद है कि गांव के लोगों को स्वावलंबी, सुखी और हर एक के चेहरे पर मुस्कान मिल सके। इस दिशा में ग्रामीण विकास विभाग कार्य योजना तैयार कर चुकी है।

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि रांची के कांके स्थित कृषि विभाग का एक बड़ा भूखंड पलाश मार्ट के लिए एनओसी दी गई है। यह मार्ट बहुत ही अच्छे जगह पर बनेगा। शीघ्र मुख्यमंत्री के हाथों इसका शिलान्यास होगा। यहां से लोग खरीदारी करेंगे तथा वस्तुओं को बाजार मिलेगा। मंत्री बादल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य के सभी महिलाओं को एक सम्मान मिले उनके सपनों को सच करें। समूह से जुड़कर महिलाओं को अपने परिवार में, अपने गांव में, प्रशासन में सम्मान का इजाफा मिला है। महिलाओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए सरकार ने कहीं कोई कसर नहीं छोड़ा है।

विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि यह सरस मेला अपने आप में एक अद्भुत है। हम देश-विदेश के बाजार को बताने में सक्षम है कि हमारे हाथों में क्या हुनर है। कुछ दिन पहले घासीपुर पंचायत में हमने महिलाओं का हुनर देखा था और वहां जानकारी प्राप्त हुई कि वहां माताएं बहने जिन वस्तुओं का निर्माण करती हैं। वह देश में ही नहीं विदेश में सप्लाई होती है। यह बहुत बड़े गौरव की बात है। उम्मीद है कि यह सरस मेला से भी हमारे हुनर को पूरे देश में ही नहीं विदेशों में भी पहचान मिलेगा। विधायक होने के नाते सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इन चीजों के लिए वे हर समय उनके साथ हैं।

जिला परिषद अध्यक्ष जॉइस बेसरा ने कहा कि सरकार में दूरदर्शिता है, इसलिए महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराया। क्षेत्र में चटाई, रुमाल, टेबल क्लॉथ, मोमबत्ती, अगरबत्ती, मशरूम इत्यादि का निर्माण महिलाओं द्वारा किया जाता रहा है। पर उन्हें बाजार नहीं मिल पाता। ऐसे मेले बाजार तैयार करने का माध्यम साबित होंगे। अपने हुनर का इस्तेमाल कर महिलाएं अब किसी के ऊपर निर्भर नहीं रहेंगी। आने वाले दिनों में यह एक औद्योगिक क्रांति साबित होगी। अगर इस तरह के मेले का आयोजन होता रहेगा तो पूरे वर्ष मेहनत कर महिलाएं और उत्सुकता से कई वस्तुओं का निर्माण करेंगी तथा मेले से उन्हें आय वृद्धि भी होंगी।

संबोधन के बाद सभी अतिथियों द्वारा गांधी मैदान में लगे स्टॉल का निरीक्षण किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस दौरान स्टॉल से सामानों की खरीदारी की। वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत पाइका, छऊ नृत्य, प्राचीन लोकनृत्य नटुवा, शिकारी जैसी अद्भुत नृत्य रूपों के कार्यक्रम का आयोजन हुआ। रविवार रहने की वजह से महिलाओं की खासी भीड़ देखने को मिली। अतिथियों का स्वागत डीसी रविशंकर शुक्ल ने किया। मौके पर डीआईजी सुदर्शन प्रसाद मंडल, एसपी अंबर लकड़ा, डीएफओ अविरूप सिन्हा, जिप उपाध्यक्ष सुधीर मंडल, डीडीसी कर्ण सत्यार्थी, भारतीय वन सेवा के अधिकारी सात्विक आदि मौजूद थे।

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