पंचायत चुनाव BJP की रणनीति, पहले चरण सिर्फ 3 जिले में ही चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी, 6 जिलों का इनकार
पंचायत चुनाव BJP की रणनीति, पहले चरण सिर्फ 3 जिले में ही चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी, 6 जिलों का इनकार
चंडीगढ़। नगर परिषद और पालिकाओं के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद भाजपा की जिला इकाइयां पंचायत चुनाव में पार्टी सिंबल पर मैदान में उतरने से बच रही हैं। बुधवार को पहले चरण के नौ जिलों में नामांकन का आखिरी दिन है, लेकिन सिर्फ पंचकूला, यमुनानगर और नूंह की जिला इकाइयों ने ही चुनाव में पार्टी प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया है। पानीपत, भिवानी, झज्जर, जींद, कैथल और महेंद्रगढ़ ने आलाकमान को कमल के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़ने के निर्णय से अवगत करा दिया है।पिछले दिनों 46 नगर परिषदों और पालिकाओं के चुनाव में 22 में प्रधान बनाने में सफल रही भाजपा और और तीन पालिकाओं में चेयरमैन बनाने वाली जजपा ने जिला परिषद के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने या नहीं लड़ने का निर्णय स्थानीय निकायों पर छोड़ा हुआ है।

निकाय चुनावों की तर्ज पर कांग्रेस ने पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने से पहले ही इन्कार कर दिया था। अब कांग्रेस की रणनीति पर चलते हुए भाजपा ने भी अधिकतर जिलों में कमल के चुनाव चिन्ह पर लड़ने की बजाय अपने प्रत्याशियों को निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतारने की योजना बनाई है।
इसी रणनीति के तहत पहले चरण के नौ जिलों में भाजपा ने तीन जिलों में ही प्रत्याशी घोषित किए हैं, जबकि बाकी छह जिलों में अघोषित रूप से समर्थकों को मैदान में उतारा है। इन जिलों में जिला परिषद के सदस्य के लिए कई दावेदार थे, जिससे स्थानीय इकाइयों ने किसी दावेदार को नाराज करने का जाेखिम उठाना ठीक नहीं समझा। इसके उलट जो भी पार्षद जीतेगा, पार्टी उसे अपना बताकर अपनी पसंद का चेयरमैन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।पंच-सरपंच और ब्लाक समिति के सदस्यों के पद के लिए भाजपा आलाकमान के स्तर पर पहले ही किसी को चुनाव चिन्ह नहीं देने का निर्णय लिया जा चुका है। प्रदेश में इंडियन नेशनल लोकदल और आम आदमी पार्टी ने पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने की घोषणा कर रखी है। रणनीति के तहत दोनों दलों ने नगर परिषद वार्डों में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं।












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