अब मनमर्जी तरीके से नहीं बढ़ेगी प्राइवेट स्कूलों की फीस, पैरेंट्स की मांग पर हरियाणा सरकार ने लिया बड़ा फैसला
चंडीगढ़। प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमर्जी तरीके से फीस बढ़ाने पर हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने राज्य की शिक्षा नीति में संशोधन किया और निजी स्कूलों में फीस बढ़ाने को राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के साथ जोड़ा है। नए नियम के तहत राज्य सरकार ने उन प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा कसा है जो हर साल किसी न किसी बहाने छात्रों की फीस बढ़ा रहे थे। नए नियम के अनुसार राज्य के प्राइवेट स्कूल, वर्तमान शैक्षणिक सत्र की सीपीआई के आधार पर ही फीस बढ़ा सकेंगे। अगर वर्तमान शैक्षणिक सत्र के दौरान सीपीआई 4 प्रतिशत है तो स्कूल्स 9 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। यह फैसला माता-पिता की अपील के बाद आया है जिसमें गैर तरीके से स्कूल फीस बढ़ाने के मामलों में सरकार के हस्तक्षेप की मांग की थी।

यहां समझें स्कूल फीस कैसे और कितनी बढ़ सकती है
सरकार द्वारा जारी नोटिस में हरियाणा स्कूल फीस वृद्धि की स्पष्ट समझ के लिए एक विशेष उदाहरण भी शामिल है। नोटिस में बताए गए उदाहरण के अनुसार, 'अगर उस समय सीपीआई 4% है, तो पिछले साल की फीस से 9% (4% +5%) से अधिक नहीं हो सकती है।' उदाहरण के तौर पर अगर किसी प्राइवेट स्कूल में एक छात्र की एनुअल फीस 1 लाख रुपये है तो उसमें 9 प्रतिशत यानी 9000 रुपये तक की ही बढ़ाया जा सकता है।
इन प्राइवेट स्कूलों को मिली राहत
राज्य सरकार ने उन प्राइवेट स्कूलों को इससे राहत दी है जो कक्षा 5 तक के लिए हर साल 12,000 रुपये या उससे कम फीस लेते हैं, और जिनकी कक्षा 6 से 12 के लिए अधिकतम शुल्क 15,000 रुपये या उससे कम है।
बता दें कि, स्कूल फीस बढ़ोतरी का सीपीआई फॉर्मूला अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। अधिकारियों ने कहा कि फीस फॉर्मूले का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है और उनका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। फीस बढ़ाने के बारे में माता-पिता की शिकायतों के साथ फीस और फंड रेगुलेशन कमेटी (FFRC) के आने के बाद शुल्क संरचना में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई थी।












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