हरियाणा: सीएम खट्टर के निर्देश, जलभराव वाली भूमि के लिए योजनाएं तैयार करें

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड की 56वीं बैठक में राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से 834.10 करोड़ रुपये की लागत की 795 नई पेयजल आपूर्ति योजनाओं को मंजूरी दी गई।

इसमें 104.27 करोड़ रुपये की लागत की 134 नई शहरी जल आपूर्ति और सीवरेज योजनाएं भी शामिल हैं।

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बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डॉ. बनवारी लाल और हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार भी उपस्थित थे। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के फ्लैगशिप कार्यक्रमों में तेजी लाने के लिए चालू वित्त वर्ष के लिए पहले से मंजूर 286 कार्यों हेतु 801.48 करोड़ रुपये की राशि की भी स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलभराव वाले इलाकों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां हर बरसात के मौसम में जलभराव होता है, ताकि इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सक्रिय उपाय किए जा सकें। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों का एक कोर ग्रुप गठित करने के भी निर्देश दिए, जो अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार जलभराव की समस्या के समाधान पर विचार-विमर्श करेगा। यह कोर ग्रुप जलभराव वाली भूमि का मत्स्य पालन, तालाबों और जल निकायों के निर्माण, सिंचाई आदि में प्रभावी उपयोग के लिए योजना तैयार करेगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि तालाबों की सफाई के साथ-साथ तालाब की मिट्टी के उपयोग की भी संभावनाएं तलाशी जाएं।

बैठक में बताया गया कि आठ महाग्राम गांवों में जल आपूर्ति और सीवरेज प्रणाली का काम पहले ही पूरा हो चुका है। वर्तमान में, 29 महाग्रामों में काम प्रगति पर है और इनमें से 10 गांवों में दिसंबर 2023 तक कार्य पूरा हो जाएगा। बाकी गांवों के लिए भी कार्य की गति बढ़ाई जाएगी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तथा विकास एवं पंचायत विभाग के फील्ड अधिकारियों को जलापूर्ति और सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत और बहाली के लिए प्राथमिकता आधार पर समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि सभी संबंधित विभागों द्वारा प्रदेश में स्थापित एसटीपी की स्थिति देखने के लिए जनस्वास्थ्य अभियां‌त्रिकी विभाग की वेबसाइट पर एक डैशबोर्ड विकसित किया गया है। इसके अलावा, उपचारित अपशिष्ट जल के उपयोग की निगरानी भी हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। इसी प्रकार, विभाग की वेबसाइट पर एक और डैशबोर्ड विकसित किया गया है जो हरियाणा की प्रत्येक ग्रामीण बस्ती के लिए प्रति व्यक्ति प्रति दिन लीटर (एलपीसीडी) आवंटित पानी की स्थिति को दर्शाता है।

बैठक में बताया गया कि राज्य में शहरी जल आपूर्ति और सीवरेज योजनाओं के संचालन व रखरखाव हेतु राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए उपभोक्ताओं को जल आपूर्ति और सीवरेज के बिल मोबाइल फोन पर एसएमएस के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को विभिन्न मापदंडों और कैशलेस विकल्पों के माध्यम से भी बिल भुगतान का विकल्प दिया गया है। जलापूर्ति कनेक्शनों को परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) आईडी के साथ जोड़ने का कार्य प्रगति पर है और ग्रामीण क्षेत्रों में 28.22 लाख कनेक्शनों में से 25.22 लाख कनेक्शनों की मैपिंग पूरी हो चुकी है।

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