राजस्थान सरकार ने बजरी माफिया पर कसी नकेल, उठाया ये अहम कदम
राज्य में अभी तक बजरी निकालने की न्यूनतम दरें तय नहीं होने से मनमाफिक दरों पर लोगों को बजरी बेची जा रही थी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजरी माफियाओं पर बड़ा प्रहार किया है। प्रदेश में जिस तरह से शराब माफियाओं को खत्म करने के लिए जिले वार ठेके निरस्त कर दुकान वार ठेके किए गए थे, उसी तरह अब नदियों में ठेकेदारों को बजरी निकालने के लिए 2 से 4 हजार हेक्टेयर तक की बजरी खनन के पट्टे देने के बजाय अधिकतम 100 हेक्टेयर के दिए जाएंगे। इससे अब चुनिंगा लोगों का बजरी कारोबार से एकाधिकार समाप्त होकर बहुतायत में लोगों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि बजरी को लेकर जो टेंडर होंगे, उसमें सबसे सस्ती दर पर बजरी उपलब्ध करवाने वाले को ही टेंडर दिए जाएंगे। अभी तक बजरी निकालने की न्यूनतम दरें तय नहीं होने से मनमाफिक दरों पर लोगों को बजरी बेची जा रही थी।
वर्तमान में 61 स्थानों पर निकल रही बजरी
प्रदेश में करीब 10 साल पहले बजरी की 106 खानों की 5 साल के लिए नीलामी की गई थी, लेकिन सभी खानों में खनन शुरू नहीं हो सका था। पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से तमाम न्यायिक अड़चनों के चलते कम ही खानों में खनन शुरू हो सका। हालांकि अभी करीब 61 खानों में बजरी खनन हो रहा है। यह खानें कुछ चुनिंगा लोगों के पास ही है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब प्रदेश की नदियों में बजरी के 550 से 600 प्लॉट दिए जा सकेंगे। इससे बजरी कारोबार पर अब कुछ लोगों के बजाय बड़ी संख्या में लोगों का एकाधिकार होगा। वहीं टेंडर प्रक्रिया में बजरी बेचने के लिए दर कम भरने वालों को ठेकों में प्राथमिकता मिलेगी।
एक बार फिर दरों में भारी कमी आ सकती है
बजरी की खानों की एक दशक पहले नीलामी की गई थी, उससे पहले बाजार में बजरी मात्र 17 से 18 रुपए फीट में बिक रही थी। लेकिन, खानों को नीलामी के बाद दरों पर अंकुश नहीं लगाने से भाव बढ़कर बीच-बीच में कई बार 80 रुपए फीट की दर को भी पार कर गए थे। आज भी बाजार में बजरी 50 से 60 रुपए फीट तक बिक रही है। नई व्यवस्था में एक बार फिर दरों में भारी कमी आ सकती है।












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