तेलंगाना और गुजरात में बाढ़ से केंद्र के पक्षपाती होने का पता चलता है
एनडीए सरकार बाढ़ राहत राशि देने के मुद्दे पर तेलंगाना के प्रति लगातार भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीआरएफ के संबंध में कोई घोषणा या आश्वासन दिया
केंद्र की बीजेपी नीत एनडीए सरकार बाढ़ राहत राशि देने के मुद्दे पर तेलंगाना के प्रति लगातार भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। हालांकि, पिछले हफ्ते की बारिश से बड़े पैमाने पर फसल और संपत्ति को नुकसान हुआ है। पिछले कुछ दिनों के दौरान राज्य में बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में कम से कम 18 लोगों की जान चली गई है। केंद्र ने इस समस्या से निपटने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम (आईएमसीटी) मौके पर जाकर आकलन करेगी।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कोई घोषणा या आश्वासन नहीं दिया गया है, जिनके मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) आता है। यहां तक कि जो टीम आई है, वह सिर्फ नुकसान का आकलन करेगी और आगे राज्य सरकार के विस्तृत ज्ञापन सौंपने पर केंद्रीय टीम दूसरी बार फिर से राज्य का दौरा कर सकती है।

हालांकि, केंद्रीय टीम अपने दूसरे दौरे में कितना समय लेती है और केंद्र को रिपोर्ट सौंपती है, इसका अंदाजा किसी को नहीं है। यहां तक कि 2020 के दौरान, जब हैदराबाद शहर में भारी बारिश हुई और कई इलाके जलमग्न हो गए, तब भी केंद्र से कोई बड़ी मदद नहीं मिली, बावजूद इसके कि मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर 1,350 करोड़ रुपए और 5,000 करोड़ रुपए की एनडीआरएफ फंड के तहत तत्काल मदद का अनुरोध किया था।
दूसरी ओर, पीएम मोदी ने 2021 में राज्य में चक्रवात तूफान ताउते से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद गुजरात में "तत्काल राहत गतिविधियों" के लिए 1,000 करोड़ रुपये की सहायता को मंजूरी दी। पिछले साल भी जब गुजरात में भारी बारिश हुई थी, तो प्रधानमंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल से संपर्क किया था। स्थिति की जानकारी ली और हर संभव सहायता की पेशकश की।












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