सोरेन अयोग्य घोषित हुए तो भी सरकार पर खतरा नहीं होगा, महागठबंधन के विधायकों ने बताई यह वजह

राज्य में एक हफ्ते से जारी सियासी संकट के बीच गुरुवार को महागठबंधन में शामिल दलों झामुमो, कांग्रेस और राजद के दस सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। राज्यपाल को सत्ताधारी दल के 34 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ स

रांची,2 सितंबर: राज्य में एक हफ्ते से जारी सियासी संकट के बीच गुरुवार को महागठबंधन में शामिल दलों झामुमो, कांग्रेस और राजद के दस सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। राज्यपाल को सत्ताधारी दल के 34 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ सौंपे ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि अगर हेमंत सोरेन की सदस्यता पर चुनाव आयोग का मंतव्य आया है तो जल्द स्थिति स्पष्ट करें।

hemant
उन्हें संबोधित पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की अयोग्यता अगर सामने आती है तब भी सरकार पर कोई इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि, झामुमो-कांग्रेस-राजद-निर्दलीय गठबंधन को अभी भी राज्य विधानसभा में प्रचंड बहुमत प्राप्त है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राजभवन के बाहर मीडिया से कहा कि राज्यपाल ने जल्द स्थिति स्पष्ट करने को लेकर आश्वस्त किया है।

राज्यपाल को संबोधित पत्र में कहा गया है कि 25 अगस्त से राजभवन के सूत्रों के हवाले से मीडिया में व्यापक रूप से यह प्रसारित किया जा रहा है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत चुनाव आयोग से बरहेट विधानसभा क्षेत्र के विधायक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9-ए के तहत अयोग्य घोषित करने संबंधी पत्र राजभवन को प्राप्त हुआ है। यह भी बातें आ रही हैं कि राज्यपाल जल्द इन प्रावधानों के तहत हेमंत सोरेन को अयोग्य घोषित करने का निर्णय लेंगे।

नमामि गंगे पर उठे सवाल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मांगा खर्चे का हिसाब, कहा- आंखों में धूल झोंकने वाला प्रोजेक्ट
राजभवन संवैधानिक कार्यालय है ज्ञापन में कहा गया है कि राजभवन के सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें दुर्भाग्यपूर्ण है। क्योंकि राजभवन संवैधानिक कार्यालय है और जनता की नजरों में इसके प्रति अत्यंत सम्मान रहता है। ऐसे में राजभवन से झूठी अफवाह का प्रसारित होना राज्य में अराजकता और भ्रम की स्थिति पैदा कर राज्य के प्रशासन और शासन को प्रभावित कर रहा है। यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए राजनीतिक द्वेष को भी प्रोत्साहित करता है।

राज्यपाल से सच सामने लाने की मांग
सच सामने लायें ताकि राज्य में फैली भ्रम की स्थिति और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के असंवैधानिक प्रयास पर विराम लगे। चुनाव आयोग से यदि मंतव्य प्राप्त हुआ है तो इसे जल्द सार्वजनिक करके लोकतंत्र के उद्देश्य को पूरा किया जाए। इसमें विलंब प्रतिष्ठित राजभवन के संवैधानिक कर्तव्यों और मूल्यों के विपरीत होगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+