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इजिप्ट खरीदेगा मध्य प्रदेश का गेहूं, प्रतिनिधिमंडल ने इंदौर आकर जानी मालवी और शरबती गेहूं की खूबियां

इंदौर। दुनिया के सबसे बड़े गेहूं आयातक देश इजिप्ट ने मध्यप्रदेश का गेहूं खरीदने में रुचि दिखाई है। मालवा सहित मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पैदा होने वाला गेहूं इजिप्ट (मिस्र) में निर्यात होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी सिलसिले में इजिप्ट सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को इंदौर आया और मालवी और शरबती गेहूं की खूबियां जानी।

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दल में आए अधिकारियों ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र पहुंचकर गेहूं की अलग-अलग किस्में देखी। साथ ही वेयर हाउस पहुंचकर गेहूं के नमूने देखे। इजिप्ट के दल ने शहर के एक निजी होटल में जिला प्रशासन, मंडी बोर्ड, कृषि विभाग और गेहूं निर्यातक व्यापारियों से चर्चा की।

दरअसल, यूक्रेन में युद्ध के कारण भारत से गेहूं निर्यात की संभावनाएं बढ़ गई हैं, इसलिए यूक्रेन पर निर्भर रहने वाले इजिप्ट जैसे देशों ने गेहूं आयात करने के लिए भारत का रुख किया है। इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए भारत सरकार और इजिप्ट सरकार के बीच गेहूं के निर्यात को लेकर सहमति बनी है। दरअसल मध्यप्रदेश का शरबती और मालवी गेहूं गुणवत्ता और पोषक तत्वों के मामले में देशभर में मशहूर है। इसलिए केंद्र सरकार ने इजिप्ट के दल को सबसे पहले मध्यप्रदेश भेजा। मध्यप्रदेश के गेहूं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इस संभावना को हाथोंहाथ लिया और इजिप्ट के दल को मध्यप्रदेश में आमंत्रित किया।

इंदौर आए प्रतिनिधिमंडल में इजिप्ट सरकार के कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारी इस्लाम फरहत अब्देल अजीज, डा. सलेह अब्देल सत्तार बहिग अहमद, इंजीनियर अहमद राबिया अब्दुल्ला अब्देल कादर, भारत सरकार की संस्था एपीडा के क्षेत्रीय प्रभारी डा. सीबी सिंह और पादप सुरक्षा सलाहकार डा. रविप्रकाश और डा. संजय आर्य शामिल थे। कलेक्टर मनीषसिंह, मंडी बोर्ड के अतिरिक्त संचालक डीके नागेंद्र, मंडी के भारसाधक अधिकारी राजेश राठौर, संयुक्त संचालक चंद्रशेखर वशिष्ठ, कृषि उप संचालक एसएस राजपूत ने प्रतिनिधिमंडल के साथ गेहूं निर्यातकों की बैठक कराई।

गेहूं अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डा. केसी शर्मा ने मध्यप्रदेश में पैदा होने वाली शरबती और मालवी (ड्यूरम) गेहूं की अलग-अलग किस्मों की खूबियाें को प्रस्तुतिकरण दिया। साथ ही बताया कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के गेहूं में करनाल बंट नाम की बीमारी आती है, लेकिन मध्यप्रदेश का गेहूं इस बीमारी से मुक्त है।

रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण देखने आए गेहूं आयात की संभावनाएं

इजिप्ट के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख इस्लाम फरहत ने बताया कि रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुए हालात के बाद हम भारत से गेहूं आयात की संभावनाएं तलाशने के लिए आए हैं। हमारी यह यात्रा पहले भी प्रस्तावित थी लेकिन कोरोना के कारण यह स्थगित हो गई थी। भारत इस समय इजिप्ट के निर्यातक देशों की अधिमान्य सूची में शामिल नहीं है। उम्मीद है कि इस यात्रा के बाद हम भारत को निर्यातक देशों की सूची में जोड़ सकते हैं। भारत का ध्यान कृषि क्रांति पर है और वह गुणवत्ता और उत्पादन को बढ़ाने वाली नई किस्मों को अपना रहा है। कलेक्टर मनीषसिंह ने गेहूं निर्यात के लिहाज से इंदौर को आदर्श बताया।

इंदौर के प्रमुख गेहूं निर्यातक पंकज गोयल ने इजिप्ट के अधिकारियों को बताया कि मध्यप्रदेश का गेहूं गुणवत्ता में तो बेहतर है ही, परिवहन के लिहाज से भी यह गुजरात बंदरगाह के नजदीक है। इस कारण मालवा से गेहूं का निर्यात बहुत सुगम होगा। एपीडा के अधिकारी डा. सिंह ने निर्यातकों को सलाह दी कि इजिप्ट को गेहूं निर्यात करने से पहले वहां रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसमें एपीडा मदद करेगी। आइटीसी और अन्य कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी मध्यप्रदेश से गेहूं निर्यात की उजली संभावनाओं के बारे में बताया।

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