सीएम केजरीवाल और एलजी के बीच बढ़ा विवाद, दिल्ली सरकार अब फॉलो करेगी TBR रूल
दिल्ली सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एलजी से सीधे आदेश लेना बंद करें। सरकार के मंत्रियों ने अपने विभागों से जुड़े सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वो TBR का सख्ती से पालन करें।

केजरीवाल सरकार और एलजी के बीच एक बार फिर टकराव बढ़ गया है। सरकार ने तमाम सरकारी अफसरों को टीबीआर नियम को ध्यान में रखने की हिदायत दी है। दिल्ली सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उपराज्यपाल (एलजी) से सीधे आदेश लेना बंद करें। सरकार के मंत्रियों ने अपने विभागों से जुड़े सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वो ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स या कार्य संचालन नियम (TBR) का सख्ती से पालन करें। अगर एलजी से कोई भी सीधे आदेश मिलता है तो संबंधित विभागीय मंत्री को रिपोर्ट करें।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू कराने के लिए सरकार की ओर से गंभीरता से काम किया जाएगा। उनका कहना है कि पिछले दिनों ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं, जब एलजी ने संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए चुनी हुई सरकार को दरकिनार कर दिया। इसमें हज कमेटी के सदस्यों की नियुक्ति, एमसीडी में एल्डरमैन का मनोनयन, एमसीडी में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति, सीआरपीसी-196 के मामलों में अभियोजन स्वीकृति सहित अन्य फैसले शामिल हैं।
तीन विषय दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर
ये सभी फैसले दर्शाते हैं कि एलजी सीधे अधिकारियों को आदेश-निर्देश दे रहे हैं। यह टीबीआर के नियम -57 का उल्लंघन है। संविधान और सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, भूमि, पुलिस और पब्लिक ऑर्डर जैसे तीन विषय दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। इन्हें आरक्षित विषय कहा जाता है। सरकारी आदेश में कहा गया कि बाकी सभी पर प्रदेश सरकार को फैसले लेने का अधिकार है। जिन्हें अनारक्षित विषय कहा जाता है। स्थानांतरित विषय पर मंत्रिपरिषद के फैसले से अलग राय रख सकते हैं, लेकिन सीधे अधिकारियों को आदेश या निर्देश नहीं दे सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी उल्लेख किया है कि जिसमें स्पष्ट किया है कि एलजी को दिल्ली सरकार के नियम-1993 टीबीआर के नियम-49 और 50 की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। यह नियम एलजी, एक मंत्री या मंत्रिपरिषद के बीच किसी विषय पर मतभेद के मामले में पालन की जाने वाली प्रक्रिया को निर्धारित करते हैं।












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