नए राज्यपाल से बोले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, आरक्षण पर जल्द निर्णय हो

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- मैंने आरक्षण के मामले में राज्यपाल से बात की है उनको बताया है कि प्रदेश में सरकारी भर्ती रुकी है। हम चाहते हैं कि इस पर जल्द निर्णय हो।

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छत्तीसगढ़ के नए राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुलाकात की। राजभवन में हुई इस मुलाकात में प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े सियासी मसले यानी की आरक्षण बिल पर भी बात हुई। कुछ देर तक चली बात-चीत के वक्त वहां प्रदेश के मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी मौजूद थे। आरक्षण पर प्रदेश के इन अफसरों ने भी राज्यपाल को जानकारी दी।

मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- मैंने आरक्षण के मामले में राज्यपाल से बात की है, उनको बताया है कि प्रदेश में सरकारी भर्ती रुकी है। हम चाहते हैं कि इस पर जल्द निर्णय हो। ताकि प्रदेश के हित में काम हो सके, राजनीति अपनी जगह है। सब का उद्देश्य जनता का हित है, युवा पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसलिए तत्काल संज्ञान लेकर फैसला करने के लिए राज्यपाल से आग्रह किया।

राज्यपाल के शपथ ग्रहण के बाद सीएम भूपेश बघेल नए राज्यपाल को बुके भेंटकर उनका स्वागत किया था।
राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने आरक्षण के बिल पर जानकारी लेकर सकारात्मक फैसला करने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें राज्यपाल के अनुभव का फायदा मिलेगा, मुझे उम्मीद है कि वे जल्द ही इस पर फैसला लेंगे, वो लॉ मिनिस्टर रह चुके हैं, राजनीति और प्रशासनिक काम काज का अच्छा अनुभव है और इस तरह के मामलों के बारे में वो जानते हैं।

क्या है आरक्षण का मसला ?
राज्य सरकार ने 2 दिसंबर को विधानसभा के विशेष सत्र में राज्य में विभिन्न वर्गों के आरक्षण को बढ़ा दिया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 फीसदी, ओबीसी के लिए 27 फीसदी, अनुसूचित जाति के लिए 13 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 4 फीसदी आरक्षण कर दिया गया। इस विधेयक को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। तब राज्यपाल रहीं अनुसूईया उइके ने इसे स्वीकृत करने से इनकार कर दिया और अपने पास ही रखा। राज्यपाल के विधेयक स्वीकृत नहीं करने को लेकर एडवोकेट हिमांक सलूजा ने और राज्य शासन ने याचिका लगाई थी। राज्य शासन ने आरक्षण विधेयक बिल को राज्यपाल की ओर से रोकने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस केस की अभी सुनवाई लंबित है।

पिछली राज्यपाल और CM के बीच रहा इस मसले पर विवाद
इस पूरे मसले पर कई बार प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर राज्यपाल और उनके विधिक सलाहकार जानबूझकर विधेयक काे अटकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने राजभवन के विधिक सलाहकार को भाजपा का एजेंट तक बताया था। कांग्रेसियों ने शहर के कई हिस्सों में पोस्टर लगाकर भाजपा के कार्यालय को राजभवन संचालन केंद्र बता दिया था।

पिछली बार राजभवन ने विधेयक को लेकर विभागों से सवाल किया था। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा- उन्हें वो अधिकार ही नहीं। राजभवन के विधिक सलाहकार हैं, गलत सलाह दे रहे हैं । पहले राज्यपाल ने कहा था कि जैसे ही विधानसभा से प्रस्ताव आएगा मैं हस्ताक्षर करूंगी। आरक्षण किसी एक वर्ग के लिए नहीं होता है। सारे नियम होते हैं। क्या राजभवन को पता नहीं, विधानसभा से बड़ा है क्या कोई विभाग ?

भाजपा घड़ियाली आंसू बहा रही
आरक्षण के मसले के अलावा मुख्यमंत्री ने बीजेपी नेताओं को लेकर कहा कि, भाजपा के लोग झूठ बोलने वाले लोग हैं। PM आवास को लेकर उन्होंने आगे कहा कि अब नए हितग्राही तैयार हैं। इनका तब पता चलेगा जब जनगणना और आर्थिक सर्वे कराएं जाएंगे। इसी का आग्रह प्रधानमंत्री से मुलाकात में मैंने किया है। न सिर्फ आवास बल्कि बहुत सी योजनाएं हैं, जिसमें सर्वे के बाद फायदा मिलेगा। अब छत्तीसगढ़ सरकार 1 अप्रैल से आवास के लिए सर्वे कराएगी। हम आवास हितग्राही को देंगे। भाजपा के पास घड़ियाली आंसू बहाने के सिवाए कुछ रहा नहीं है।

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