केंद्र के दावे खोखले, ओडिशा में लोगों की कमर तोड़ रही सब्जी की कीमतें
केंद्र सरकार महंगाई कम होने के लाख दावे करें लेकिन सच्चाई यह है कि ओडिशा में सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम लोगों को अपने दैनिक भोजन मैन्यू में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
व्यापारी जहां देश में पड़ रही भीषण गर्मी के हालात और फसलों को हुए नुकसान को इस स्थिति को जिम्मेदार ठहराते हैं, वहीं राज्य के भीतर मौसमी साग और सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने निम्न और मध्यम आय वाले लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। खुदरा बाजार में टमाटर को छोड़कर लगभग सभी सब्जियां 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही हैं।

हर उड़िया घर में एक आम सब्जी के तौर पर खाए जाने वाले बैंगन की कीमत अप्रैल के आखिरी हफ्ते के मुकाबले दोगुनी हो गई है। स्थानीय बाजारों में जो सब्जी 20-23 रुपये किलो मिलती थी, वह अब 60-80 रुपये किलो बिक रही है।
हर बार वही गर्मी होती थी, जब परवल, जिसे आमतौर पर पोटाला के नाम से जाना जाता है, प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता था और इस सब्जी की कीमतें 40 रुपये किलो रहती थीं। लेकिन, इस बार गर्मी कुछ अलग है। पोटाला की कीमत अप्रैल में 120 रुपये प्रति किलोग्राम थी और मई में थोड़ी होकर 60 रुपये हो गई। लेकिन, एक बार फिर से इसके रेट 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
गर्मी का ये सीजन तोरई का भी है, लेकिन इस बार ये सब्जी भी 60 से 80 रुपए प्रति किलो बिक रही है। टमाटर जो दो सप्ताह पहले तक 20 रुपये किलो था, अचानक महंगा हो गया है। स्थानीय बाजार में टमाटर की कीमत 40 रुपये किलो है जबकि सुपर बाजार में यह 45-50 रुपये किलो बिक रहा है।
राजमा, शिमला मिर्च और सहजन की कीमतों में भी भारी बदलाव हुआ है। बीन्स की खुदरा कीमत, जो कर्नाटक से आती है, 110-120 रुपये के थोक मूल्य के मुकाबले 220-240 रुपये प्रति किलोग्राम है। शिमला मिर्च जो अप्रैल में 20 रुपये किलो पर उपलब्ध थी और मई के पहले सप्ताह तक यूनिट-1 बाजार में मई के दूसरे सप्ताह में 60 रुपये किलो तक पहुंच गई। शिमला मिर्च का थोक भाव अभी 75-80 रुपये किलो है जबकि खुदरा भाव 100-120 रुपये है। सब्जी मंडी में अदरक सबसे महंगी चीजों में से एक बन गई है। हर किसी की रसोई में मौजूद अदरक बाजार में 280-300 रुपये प्रति किलो बिक रही है।












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