कलम के सिपाही 'श्रीलाल शुक्‍ल' पंचतत्‍व में विलीन

Srilal Shukla
लखनऊ। कलम के जरिये सामाजिक व्यवस्थाओं पर चोट करने वाला कलम का एक और सिपाही कोरे कागजों के ढेरों टुकड़े छोड़कर चला गया। प्रख्यात लेखक श्रीलाल शुक्ल के निधन की खबर आते ही साहित्यजगत में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया। लखनऊ के इस बाशिंदे के निधन की खबर सुन पूरा लखनऊ शोक मे डूब गया।

श्रीलाल शुक्ल व उनकी लेखनी को जानने वालों ने उनकी निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह कमीं वर्षों बरश पूरी नहीं हो सकेगी। प्रख्यात लेखक श्रीलाल शुक्ल के निधन से स्तब्ध साहित्यजगत ने उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से अंतिम विदाई दी।

शुक्ल को उनके बेटे आशुतोष शुक्ल ने गोमती नदी तट पर भैंसाकुण्ड में मुखाग्नि दी। इस अवसर पर साहित्यकार रवीन्द्र वर्मा, कामतानाथ, शशांक, भवानी शंकर शुक्ल, वीरेन्द्र सारंग एवं राज्यपाल के प्रमुख सचिव जीबी पटनायक समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। साहित्यकारों की इच्छा थी कि पद्म एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले श्री शुक्ल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से हो। ऐसा नहीं होने पर कई साहित्यकारों ने रोष व्यक्त किया।

प्रख्यात साहित्यकार वीरेन्द्र सारंग ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल उच्चकोटि के साहित्यकार थे जिनकी लेखनी को लोग वर्षों याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि वह पद्मभूषण से सम्मानित थे इसलिए उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से किया जाना चाहिए था। ज्ञानपीठ पुरस्कार और पद्मभूषण से सम्मानित तथा राग दरबारी जैसा कालजयी व्यंग्य उपन्यास लिखने वाले मशहूर व्यंग्यकार श्रीलाल शुक्ल का निधन राजधानी के एक निजी अस्पताल में हुआ।

उनकी उम्र 86 वर्ष थी तथा वह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। 31 दिसंबर 1925 को लखनऊ जिले के अतरौली गांव में जन्मे श्री शुक्ल को गत 16 अक्टूबर को पार्किन्सन बीमारी के चलते चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था जहां पूर्वान्ह 11.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। 1947 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त कर उन्होंने 1949 में राज्य सिविल सेवा में अपनी नौकरी शुरु की और 1983 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से अवकाश ग्रहण किया था।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी एल जोशी ने श्रीलाल शुक्ल के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि श्रीलाल शुक्ल का निधन हिन्दी साहित्य जगत की अपूर्णनीय क्षति है। उन्होंने कहा कि श्री शुक्ल ने राग दरबारी, मकान, सूनी घाटी का सूरज, पहला पड़ाव तथा विश्रामपुर का संत आदि कालजयी रचनाओं के माध्यम से साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनायी थी। ज्ञात हो कि हाल में श्री शुक्ल को अस्पताल में जाकर राज्यपाल ने ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा था।

मुख्यमंत्री मायावती ने हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि श्री शुक्ल ने हिन्दी जगत की लम्बे समय तक सेवा की और अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया।।उनके निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम ङ्क्षसह यादव ने श्री शुक्ल के निधन पर गहरा दुख प्रकट करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने श्री शुक्ल के निधन पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि वह स्वतंत्रता सेनानी तथा प्रख्यात साहित्यकार थे। हिन्दी साहित्य जगत को उनकी कमी सदैव खलती रहेगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+