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World Food India 2017: जानिए 'खिचड़ी' के बारे में कुछ चटपटी बातें, जो बदलेंगी आपका जायका...

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    नई दिल्ली। वर्ल्ड फूड फेस्ट‍िवल की शुरुआत शुक्रवार से हुई है, जिसमें 'खिचड़ी' को देश के सबसे पसंदीदा खाने के रूप में पेश किया गया है आपको बता दें कि यह पहला मौका है कि जब सरकार इतने बड़े लेवल पर भारतीय खानों को प्रमोट कर रही है। जैसे ही खबर आई कि 'खि‍चड़ी' को नेशनल फूड घोषित करने की योजना है, तब से ही सोशल मीडिया पर लोगों ने 'खिचड़ी' पकानी शुरू कर दी, आम तौर पर मरीजों और बूढ़ों का भोजन समझे जाने वाले इस व्यंजन पर इतनी कहानियां गढ़ दी गई कि लोगों के दिमाग में ही 'खिचड़ी' पक गई। हालांकि केंद्रीय खाद्य मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने स्पष्ट किया है कि 'खिचड़ी' को राष्ट्रीय भोजन घोषित किए जाने की योजना नहीं है, बल्कि विश्व रिकॉर्ड के लिए इसे भारत की ओर से फूड फेस्ट‍िवल में एंट्री दी गई है। फिलहाल जो भी हो लोगों ने भारतीय जायकेदार 'खिचड़ी' पर जमकर चटकारे लिए हैं इसलिए इस पौष्टिक डिश के बारे में जानना काफी जरूरी हो जाता है।

    चलिए एक नजर डालते हैं इस व्यंजन की कुछ खास बातों को... 

    दाल और चावल

    दाल और चावल

    'खिचड़ी' दाल और चावल को एक साथ उबाल कर बनाई जाती है, जो कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से काफी अच्छी होती है, ये पचने में आसान होती है और इसी कारण छोटे बच्चों, रोगियों और बुजर्ग लोगों को ये खाने को दी जाती है।

    'मकर संक्रांति' के पर्व को 'खिचड़ी' के नाम से ही जाना जाता

    'मकर संक्रांति' के पर्व को 'खिचड़ी' के नाम से ही जाना जाता

    भारत पंरपराओं और संस्कारों का देश है और इसी कारण हर खाने-पीने की चीजों का संबंध यहां पर पर्व से होता है, तो भला 'खिचड़ी' कैसे इससे अछूती रह सकती है। उत्तर भारत में 'मकर संक्रांति' के पर्व को 'खिचड़ी' के नाम से ही जाना जाता है। इस दिन हर घर में 'खिचड़ी' बनना अनिवार्य होता है। और इस दिन 'खिचड़ी' दान भी की जाती है।

     दो परिवार अलग नहीं हो सकते

    दो परिवार अलग नहीं हो सकते

    यही नहीं उत्तर भारत में जिस घर में शादी होती है तो शादी के दूसरे दिन समधी को भारत में 'खिचड़ी' खिलाने की परंपरा है, इसके पीछे कारण ये बताया जाता है कि जिस तरह से 'खिचड़ी' बनने के बाद दाल-चावल अलग नहीं हो सकते हैं, वैसे शादी होने के बाद दो परिवार अलग नहीं हो सकते हैं, ये 'खिचड़ी' की तरह साथ रहेंगे।

    चावल-मूंगफली और करी पत्ते के साथ

    चावल-मूंगफली और करी पत्ते के साथ

    कहते हैं भारत में हर चार कोस पर भाषा बदल जाती है, परंपराएं बदल जाती हैं और जायके भी बदल जाते हैं, 'खिचड़ी' के साथ भी कुछ इसी तरह का हाल है, नार्थ में जहां दाल-चावल-नमक और हल्दी के साथ 'खिचड़ी' पकती है वहीं दक्षिण भारत में ये चावल-मूंगफली और करी पत्ते के साथ बनाई जाती है।

    अंग्रेजों के जमाने में...

    अंग्रेजों के जमाने में...

    एक इतिहास ये भी है कि अंग्रेजों के जमाने में जब गेहूं पीसने में दिक्कत आती थी तब खिचड़ी कैदियों को खिलाने का एक बेहतर विकल्प था और तभी से जेल की खिचड़ी फेमस हो गई है।

    शरीर को बीमारियों से सुरक्षित रखने में मददगा

    शरीर को बीमारियों से सुरक्षित रखने में मददगा

    डॉक्टरों के मुताबिक खिचड़ी खाने के तीन बेहतरीन फायदे होते हैं, खिचड़ी कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, कैल्शियम, फाइबर्स, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस के गुणों से भरपूर होती है, आप चाहें तो इसमें विभिन्न प्रकार की सब्ज‍ियां मिलाकर इसके पोषक गुणों को और बढ़ा सकते हैं। 'खिचड़ी' शरीर को बीमारियों से सुरक्षित रखने में मददगार होती है। 'खिचड़ी' के नियमित सेवन से वात, पित्त और कफ का दोष दूर हो जाता है, 'खिचड़ी' शरीर को ऊर्जा तो देने का काम करती ही है, साथ ही ये रोग प्रतिरक्षा तंत्र को भी बूस्ट करने का काम करती है।

     'खिचड़ी' के चार यार...

    'खिचड़ी' के चार यार...

    वैसे खिचड़ी के बारे में एक कहावत बहुत फेमस है, जो कि सादी सी डिश का महत्व बढ़ा देती है... और वो है 'खिचड़ी' के चार यार-घी, पापड़, दही, अचार।

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    English summary
    Prime Minister Narendra Modi Friday inaugurated World Food India 2017 at Vigyan Bhavan in New Delhi. Here is some Delicious facts about Khichdi.

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