परंपरा: पौधे जैसा हरा-भरा हो बेटी का संसार

धरहरा गांव की ये रीत अब गांव की संस्कृति बन चुकी है। गांववाले बताते हैं कि पहले इस गांव में वृक्ष इक्का-दुक्का ही नजर आते थे लेकिन अब यह गांव वृक्षों से भरा पड़ा है। बेटियों के जन्म के समय लगाये गये पेड़ ना केवल गांव के पर्यावरण का ख्याल रख रहे हैं बल्कि गांववालों की अधिकांश जरूरतें इन पेड़ों के सहारे ही पूरी होती हैं।
धरहरा ग्राम पंचायत के मुखिया बताते हैं, यह परंपरा गांव में काफी पहले से चली आ रही है। वह कहते हैं कि बेटी के जन्म के साथ जो 10 पेड़ लगाए जाते हैं वह उनके विवाह के समय तक बड़ा हो जाता है। सिंह कहते हैं कि यही कारण है कि आज इस गांव में कई लोग तीन से चार एकड़ जमीन पर लगे बगीचे के मालिक हैं। यही नहीं बेटियों के जन्मदिन मनाने के साथ-साथ गांवाले पेड़ों का जन्मदिन मनाना भी नहीं भूलते।
करीब पांच हजार की आबादी वाले धरहरा गांव के विमलेश सिंह के पास दो एकड़ का बगीचा है। वह कहते हैं कि उनका विवाह वर्ष 1998 में हुआ। वर्ष 2003 में इनकी पहली बेटी का जन्म हुआ था, जिसके बाद उन्होंने इस बगीचे का पहला पेड़ लगाया था।












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