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Varalakshmi Puja 2024: वरलक्ष्मी व्रत आज, भगवान विष्णु के साथ करें मां की पूजा, बरसेगा खूब धन

Varalakshmi Puja 2024 Muhurat: धन प्राप्ति प्रत्येक मनुष्य की कामना और लक्ष्य होता है। अपने परिवार को समस्त सुख-समृद्धि प्रदान करने के लिए मनुष्य दिन रात मेहनत करके धन कमाता है लेकिन अनेक मनुष्य अपने इच्छित लक्ष्य में सफल नहीं हो पाते हैं।

ऐसे मनुष्यों को माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के विशेष उपाय करने चाहिए और लक्ष्मी को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ व्रत होता है वरलक्ष्मी व्रत।

Varalakshmi Puja 2024

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण मास की पूर्णिमा के ठीक पहले आने वाले शुक्रवार को किया जाता है। इस बार यह व्रत 16 अगस्त 2024 को आ रहा है। इस दिन पवित्रा एकादशी का संयोग भी बना है इसलिए माता लक्ष्मी के साथ श्रीहरि विष्णु का पूजन सर्वफलदायी होगा।

विष्णु पुराण और नारद पुराण में वरलक्ष्मी व्रत के बारे में वर्णन मिलता है कि जो व्यक्ति वरलक्ष्मी व्रत करता है वह धन, वैभव, संपत्ति और उत्तम संतान से युक्त होता है। इस व्रत को करने से मां लक्ष्मी का पूर्ण वरदान प्राप्त होता है और व्यक्ति की अनेक पीढ़ियों से अभाव और गरीबी की छाया मिट जाती है। वर का अर्थ है वरदान और लक्ष्मी का अर्थ है धन-वैभव। वरलक्ष्मी व्रत करने वाले मनुष्य को सुख-समृद्धि के साथ भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।

वरलक्ष्मी व्रत से क्या लाभ मिलते हैं

वरलक्ष्मी व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं। परिवार के सुख और संपन्नता के लिए विवाहित पुरुष भी यह व्रत कर सकते हैं। यदि पति-पत्नी दोनों साथ में यह व्रत रखें तो दुगुना फल प्राप्त होता है। वरलक्ष्मी व्रत से आठ प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ये हैं श्री, भू, सरस्वती, प्रीति, कीर्ति, शांति, संतुष्टि और पुष्टि। अर्थात वरलक्ष्मी व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में धन, संपत्ति, ज्ञान, प्रेम, प्रतिष्ठा, शांति, संपन्नता और आरोग्यता आती है।

व्रत की पूजन सामग्री

मां लक्ष्मी की धातु या मिट्टी की प्रतिमा या चित्र, गुलाब और कमल के पुष्प, पुष्प माला, कुमकुम, हल्दी, चंदन चूर्ण, अक्षत, विभूति, मौली, दर्पण, कंघा, आम के पत्ते, पान के पत्ते, पंचामृत, दही, केले, दूध, जल, धूप बत्ती, दीपक, कर्पूर, घंटी, प्रसाद, एक बड़ा कलश।

पूजा विधि

वरलक्ष्मी व्रत की पूजा दीपावली पर लक्ष्मी पूजन की तरह ही किया जाता है। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर एक कलश स्थापित करें और उस पर सफेद रंग की रेशमी साड़ी सजाई की जाती है। वरलक्ष्मी को विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्प, मिठाई अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद अपने घर में रखे हुए स्वर्णाभूषणों का भी पूजन करें। नैवेद्य लगाएं और आरती करें।

वरलक्ष्मी पूजन मुहूर्त

  • अमृत : प्रात: 9:18 से 10:54
  • शुभ : दोप 12:31 से 2:07
  • अभिजित : दोप 12:05 से 12:56
  • लाभ : रात्रि 9:44 से 11:07
  • सिंह लग्न : प्रात: 6:09 से 8:21
  • वृश्चिक लग्न : दोप 12:45 से 3:01
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