Somvati Amavasya 2023: सोमवती अमावस्या आज, जानिए महत्व और खास बातें

सोमवती अमावस्या तिथि 19 फरवरी को सायं 4 बजकर 18 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है जो कि 20 फरवरी को दोपहर 12.36 बजे तक रहेगी। ये अमावस्या बहुत खास है।

 Somvati Amavasya 2023:

Somvati Amavasya 2023: आज सोमवती अमावस्या का पुण्य संयोग बना है। फाल्गुन की सोमवती अमावस्या तंत्र-मंत्रों की सिद्धि, शत्रुओं पर विजय और धन प्राप्ति के लिए विशेष बताई गई है। इस सोमवती अमावस्या पर शिव योग और नाग करण रहेगा इस दिन राहु और केतु क्रमश: अश्विनी के चतुर्थ और स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण में प्रवेश करेंगे। इसलिए यह अमावस्या कालसर्प दोष, नाग दोष, ग्रहण दोष आदि के निवारण के लिए विशेष रहेगी। इस दिन पितृदोष की शांति के निमित्त किसी पवित्र नदी के तट आदि पर पिंडदान, तर्पण, दान, ब्रह्मभोज आदि करवाने से अनेक कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

दोपहर 12.36 बजे तक रहेगी अमावस्या

अमावस्या तिथि 19 फरवरी को सायं 4 बजकर 18 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है जो कि 20 फरवरी को दोपहर 12.36 बजे तक रहेगी। इसलिए अमावस्या का पुण्य पर्वकाल 20 फरवरी सोमवार को सूर्योदय के समय प्रात: 7 बजे से दोपहर 12.36 बजे तक रहेगा। कुल पांच घंटे 36 मिनट के पर्वकाल के दौरान पवित्र नदियों में स्नान, पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, दान-पुण्य करना विशेष रहेगा। इस बीच शिव योग प्रात: 11 बजकर 3 मिनट से प्रारंभ होकर दूसरे दिन प्रात: 6.56 बजे तक रहेगा। इसी दिन नाग योग भी अमावस्या तिथि की समाप्ति तक अर्थात दोपहर 12.36 बजे तक रहेगा।

क्या विशेष करें

  • कालसर्प दोष के निवारण के लिए इस दिन विशेष पूजा करवाएं। शिव रुद्राभिषेक करें, महामृत्युंजय मंत्र के जाप करें।
  • यदि आपकी कुंडली में नागदोष, सर्पदोष, ग्रहण दोष है तो इस दिन शिवजी का विधिवत पूजन करें, महामृत्युंजय मंत्र की 51 माला रुद्राक्ष की माला से जप करें। इसका दशांश हवन करें और हवन में नवग्रह की समिधा का उपयोग करें। दोष से मुक्ति मिलेगी।
  • इस दिन किसी ऐसे शिवलिंग पर पंचधातु का सर्प लगवाएं जहां पहले से कोई सर्प लगा हुआ न हो। इससे कालसर्प और नाग दोष से मुक्ति मिलेगी।
  • इस सोमवती अमावस्या के दिन चांदी की सर्प की अंगूठी धारण करने से सर्पदोष से मुक्ति मिलेगी।
  • पितृदोष दूर करने के लिए किसी विद्वान पुरोहित के माध्यम से पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्धकर्म करें, ब्राह्मणों को भोजन करवाकर यथोचित दान-दक्षिणा भेंट दें।
  • गरीबों को वस्त्र, जूते-चप्पल आदि उनकी जरूरत का सामान भेंट करें। इससे भी पितरों की शांति होगी।
  • आज के दिन प्रात:काल पीपल वृक्ष की जड़ को कच्चे मीठे दूध से सींचें और 108 परिक्रमा करे हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। सूर्यास्त के बाद पीपल वृक्ष के नीचे उड़द के आटे के सात दीपक में तिल का तेल भरकर प्रज्वलित करें। सात दिन में आर्थिक संकटों का हल मिलेगा।

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