Som Pradosh Vrat 2022: प्रदोष के दिन क्यों होती है चंद्रदेव की पूजा? जानिए कथा और आरती
बहुत लोग प्रदोष के दिन पहले शिव की पूजा करते हैं और उसके बाद चंद्रदेव की आरती करते हैं,ऐसा करने से चंद्रदोष दूर होता है।

Som Pradosh Vrat 2022 Katha: मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। जिस तरह से एकादशी तिथि महीने में दो बार आती है, उसी तरह से महीने में प्रदोष व्रत भी दो बार आता है।जिनका वैवाहिक जीवन ठीक नहीं चल रहा या फिर जिनको अच्छे वर या पत्नी की तलाश है, वो तो जरूर इस व्रत को करें। प्रदोष की पूजा करने से पति-पत्नी के सारे कष्ट मिट जाते हैं और इंसान को सुख-शांति की प्राप्ति होती है। वैसे जिन लोगों को क्षय रोग होता या चंद्र दोष होता है उन्हें ये व्रत जरूर करना चाहिए।

दरअसल कहा जाता है कि चंद्रमा को क्षय रोग हुआ था, उसकी हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी, जिसके कारण वो काफी घबरा गया था और वो इसलिए भोलेनाथ की शरण में पहुंचा, जहां भगवान शिव ने उसे तुरंत सही कर दिया। उस दिन त्रयोदशी तिथि थी, जिसकी वजह से ये दिन प्रदोष के रूप में विख्यात हो गया। इसलिए बहुत लोग प्रदोष के दिन पहले शिव की पूजा करते हैं और उसके बाद चंद्रदेव की आरती करते हैं और उसके बाद अपना व्रत तोड़ते हैं।
चंद्र देव की आरती
- ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
- दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
- रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
- दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
- जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
- सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
- योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
- वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
- प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
- शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
- धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
- विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
- सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
- ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
- दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।












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