Sita Navami 2023: सीता नवमी पर करें जानकी स्तुति का पाठ, दूर होगा हर कष्ट
Shri Janaki Stuti: मिथिला नरेश जनक की बेटी होने की कारण मां सीता को तुलसीदास और बाल्मिकी दोनों ने जानकी कहकर संबोधित किया है।

Shri Janaki Stuti in Hindi (सीता नवमी): वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी का त्योहार मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन मां सीता का जन्म हुआ था। इस बार ये पावन पर्व 29 अप्रैल को है। आपको बता दें कि राजा जनक जी की पुत्री होने की वजह से उन्हें रामायण में मां जानकी कहकर संबोधित किया गया है। कहते हैं सीता नवमी के दिन मां जानकी की स्तुति करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत हो जाता है और उसे हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है। वैसे इस स्तुति को जो रोजाना पढ़ता है उसे दोगुने फल की प्राप्ति होती है।
॥ श्री जानकी स्तुतिः ॥
- जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ।
- जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ॥1॥
- दारिद्र्यरणसंहत्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम् ।
- विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम् ॥2॥
- भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम् ।
- पौलस्त्यैश्वर्यसन्त्री भक्ताभीष्टां सरस्वतीम् ॥3॥
- पतिव्रताधुरीणां त्वां नमामि जनकात्मजाम् ।
- अनुग्रहपरामृद्धिमनघां हरिवल्लभाम् ॥4॥
- आत्मविद्यां त्रयीरूपामुमारूपां नमाम्यहम् ।
- प्रसादाभिमुखीं लक्ष्मीं क्षीराब्धितनयां शुभाम् ॥5॥
- नमामि चन्द्रभगिनीं सीतां सर्वाङ्गसुन्दरीम् ।
- नमामि धर्मनिलयां करुणां वेदमातरम् ॥6॥
- पद्मालयां पद्महस्तां विष्णुवक्षस्थलालयाम् ।
- नमामि चन्द्रनिलयां सीतां चन्द्रनिभाननाम् ॥7॥
- आह्लादरूपिणीं सिद्धि शिवां शिवकरी सतीम् ।
- नमामि विश्वजननीं रामचन्द्रेष्टवल्लभाम् ।
- सीतां सर्वानवद्याङ्गीं भजामि सततं हृदा ॥8॥
॥ इति श्रीस्कन्दमहापुराणे सेतुमाहात्म्ये श्रीजानकीस्तुतिः सम्पूर्णा ॥
महत्व
जानकी स्तुति का पाठ करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। मां जानकी की कृपा से सिद्धि-बुद्धि,धन-बल और ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है। मां के प्रभाव से इंसान धनी बनता है, वो तरक्की करता है। वो हर तरह के सुख का भागीदार बनता है, उसे कष्ट नहीं होता। मां जानकी की कृपा मात्र से ही इंसान सारी तकलीफों से दूर हो जाता है और वो तेजस्वी बनता है और उसके सारे कष्टों का अंत हो जाता है।
मां सीता को प्रस्नन करने के मंत्र
- श्री जानकी रामाभ्यां नमः ।।
- जय श्री सीता राम ।।
- श्री सीताय नमः ।।
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- उद्भव स्थिति संहारकारिणीं हारिणीम् ।
- सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामबल्लभाम् ।।
- श्रीराम सांनिध्यवशां-ज्जगदानन्ददायिनी ।
- उत्पत्ति स्थिति संहारकारिणीं सर्वदेहिनम् ।।
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- श्री राम जय राम जय जय राम। श्री रामचन्द्राय नमः ।
- राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
- सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने ।।












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