Sheetala Saptami 2025: शीतला सप्तमी आज, जानिए पूजा विधि, कथा और आरती
Sheetala Saptami 2025: आज पूरा देश शीतला सप्तमी का त्योहार मना रहा है। आज के दिन महिलाएं अपने परिवार के स्वस्थ रहने के लिए व्रत करती हैं। मान्यता है कि माता शीतला चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा करती हैं।

शीतला सप्तमी व्रत और पूजा विधि (Sheetala saptami 2025)
- प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- इस दिन पका हुआ ताजा भोजन नहीं बनाया जाता है।
- एक दिन पहले बनाए गए भोजन को ठंडा करके माता को भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
- शीतला माता की प्रतिमा को जल से स्नान कराएं और हल्दी-चंदन का लेप करें।
- माता को गुड़, हल्दी, अक्षत, फूल और धूप-दीप अर्पण करें।
- माता की कथा सुनें और शीतला माता की आरती करें।
शीतला सप्तमी व्रत कथा (Sheetala saptami 2025)
प्राचीन काल में एक गांव में एक वृद्धा अपने पोते के साथ रहती थी। वह बहुत धार्मिक थी और शीतला माता की पूजा पूरे विधि-विधान से करती थी। एक दिन उसने अपनी बहू से कहा कि वह शीतला माता का व्रत रखे और ठंडा भोजन ग्रहण करे। लेकिन बहू ने इस पर ध्यान नहीं दिया और गरम भोजन बनाया।
शीतला माता की पूजा की और माता से क्षमा मांगी
इसका परिणाम यह हुआ कि बहू और उसके परिवार के सभी सदस्य अचानक बीमार पड़ गए। वृद्धा ने जब यह देखा तो उसने शीतला माता की पूजा की और माता से क्षमा मांगी। माता शीतला ने अपनी कृपा से पूरे परिवार को रोग मुक्त कर दिया। तब से यह मान्यता बन गई कि जो भी शीतला सप्तमी के दिन माता का व्रत रखता है, उसे रोगों से मुक्ति मिलती है।
शीतला माता की आरती (Sheetala saptami 2025)
- जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- आदि ज्योति महारानी,
- सब फल की दाता ॥
- ॐ जय शीतला माता..॥
- रतन सिंहासन शोभित,
- श्वेत छत्र भाता ।
- ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,
- जगमग छवि छाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- विष्णु सेवत ठाढ़े,
- सेवें शिव धाता ।
- वेद पुराण वरणत,
- पार नहीं पाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- इन्द्र मृदङ्ग बजावत,
- चन्द्र वीणा हाथा ।
- सूरज ताल बजावै,
- नारद मुनि गाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- घण्टा शङ्ख शहनाई,
- बाजै मन भाता ।
- करै भक्तजन आरती,
- लखि लखि हर्षाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- ब्रह्म रूप वरदानी,
- तुही तीन काल ज्ञाता ।
- भक्तन को सुख देती,
- मातु पिता भ्राता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- जो जन ध्यान लगावे,
- प्रेम शक्ति पाता ।
- सकल मनोरथ पावे,
- भवनिधि तर जाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- रोगों से जो पीड़ित कोई,
- शरण तेरी आता ।
- कोढ़ी पावे निर्मल काया,
- अन्ध नेत्र पाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- बांझ पुत्र को पावे,
- दारिद्र कट जाता ।
- ताको भजै जो नाहीं,
- सिर धुनि पछताता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- शीतल करती जननी,
- तू ही है जग त्राता ।
- उत्पत्ति व्याधि बिनाशन,
- तू सब की घाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- दास विचित्र कर जोड़े,
- सुन मेरी माता ।
- भक्ति आपनी दीजै,
- और न कुछ भाता ॥
- जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- आदि ज्योति महारानी,
- सब फल की दाता ॥
- ॐ जय शीतला माता..॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बातें करें।












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