Shanaischari Amavasya 2021: शनैश्चरी अमावस्या 13 को, जानिए महत्व
नई दिल्ली। वर्ष 2021 की पहली शनैश्चरी अमावस्या फाल्गुन माह में 13 मार्च को आ रही है। पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, साध्य योग और नाग करण में आ रही यह अमावस्या विशेष फलदायी है। इस दिन सूर्य और चंद्र दोनों शनि की राशि कुंभ में रहने से शनि की साढ़ेसाती, लघु कल्याणी ढैया, कालसर्प दोष, पितृ दोष, नाग दोष और सूर्य-चंद्र ग्रहण दोष से पीड़ित जातकों के लिए विशेष अवसर है जब वे कुछ विशिष्ट उपाय करके अपने इन दोषों को दूर कर सकते हैं। अमावस्या तिथि 13 मार्च को दोपहर 3.52 बजे तक रहेगी।

क्या है महत्व
अमावस्या का सोमवार, मंगलवार और शनिवार के दिन आना विशेष फलदायी होता है। सोमवार को सोमवती अमावस्या, मंगलवार को भौम अमावस्या और शनिवार को शनैश्चरी अमावस्या कहलाती है। अमावस्या पितरों की तिथि होती है, इसलिए इस दिन पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण, दान आदि कर्म किए जाने चाहिए। इस बार शनैश्चरी अमावस्या का योग बना है। यह अमावस्या साध्य योग में आ रही है इसलिए कई प्रकार की साधना, सिद्धियों की प्राप्ति के लिए इसका महत्व अधिक है।
क्या करें शनैश्चरी अमावस्या के दिन
- शनैश्चरी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। इससे भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। यदि आपके आसपास कोई पवित्र नदी नहीं है तो अपने घर में नहाने के जल में गंगाजल डालकर स्नान करें। इस दिन नहाने के पानी में थोड़े से तिल डाल लें।
- गरुड़ पुराण के अनुसार अमावस्या के दिन पितर पृथ्वी पर आते हैं। इसलिए अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण करें, गरीबों को भोजन करवाएं, दान-दक्षिणा दें। यदि आपके घर में पितृदोष है तो पितरों को याद करते हुए गुड़ घी की धूप दें।
- शनैश्चरी अमावस्या के दिन कालसर्प दोष का निवारण करवा लेना चाहिए। इस दिन काले उड़द को पीसकर, उसमें काले तिल और तिल का तेल मिलाकर सात लड्डू बना लें और इन्हें किसी निर्जन स्थान पर अमावस्या की रात्रि में रख आएं।
- वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती धनु, मकर और कुंभ राशि पर चल रही है। मिथुन और तुला राशि पर लघु कल्याणी ढैया चल रहा है। शनि से पीड़ित जातक शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनि मंदिर में बैठकर शनि स्तवराज के 21 पाठ करें। इसके बाद गरीबों को सवा किलो इमरती बांटें। इससे शीघ्र ही शनि प्रसन्न होंगे।
- शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिदेव को काले तिल, काले उड़द, काला कपड़ा, लोहा, तिल का तेल और नीले पुष्प अर्पित करें। पीड़ा दूर होगी।
- अमावस्या की रात्रि में दीपदान करने से मृत्यु का भय समाप्त होता है, आयु और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
- अमावस्या की रात्रि में पीपल के पेड़ के नीचे दीप जलाने से पैसों का अभाव दूर होता है।
- नाग दोष दूर करने के लिए अमावस्या के दिन शिवजी का अभिषेक कपिला गाय के दूध से करें।
- इस दिन चंद्र और सूर्य ग्रहण दोष दूर करने के लिए शिवजी का अभिषेक पंचामृत से करें।
- शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनि की शांति के लिए काले घोड़े की नाल से बना छल्ला धारण करें।












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