Sawan or Shravan 2019: सावन के सभी सोमवार को खास ढंग से करें शिव पूजा, मिटेंगे सारे कष्ट
नई दिल्ली। भगवान शिव की भक्ति, पूजा, आराधना का पवित्र माह श्रावण 17 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस बार श्रावण में चार सोमवार आएंगे। जुलाई माह में 22 और 29 को तथा अगस्त माह में 5 और 12 को। शिव की पूजा में सोमवार का विशेष महत्व है। वैसे तो भगवान शिव को प्रसन्न् करने के लिए पूरे श्रावण माह में विशेष पूजा की जाती है, लेकिन सोमवार को पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि सोमवार के प्रतिनिधि ग्रह चंद्र और देवता शिव हैं। भगवान शिव ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया हुआ है, इसलिए सोमवार की पूजा से न केवल शिव की कृपा प्राप्त होती है बल्कि जन्मकुंडली में बुरे प्रभाव दे रहे चंद्र की भी शांति होती है।

सावन के सभी सोमवार को खास ढंग से करें शिव पूजा
यदि आपके जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं हैं। आपकी तरक्की नहीं हो पा रही है, जीवन में बार-बार संकट आ रहे हैं, कार्यों में बाधाएं आ रही हैं, धन की आवक रूकी हुई है या वैवाहिक-पारिवारिक जीवन में कोई संकट है, रोग परेशान कर रहे हैं तो इस बार सावन के चारों सोमवार को अलग-अलग पदार्थों से शिवजी का अभिषेक करेंगे तो सारे संकटों का समाधान होगा।
आइए जानते हैं चारों सोमवार को किन पदार्थों से शिव पूजा अभिषेक किया जा सकता है...

पहला सोमवार : 22 जुलाई
श्रावण का पहला सोमवार 22 जुलाई को है। इस दिन सबसे पहले रोगमुक्ति के उपाय किए जाना चाहिए। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक शहद से करें। अभिषेक करते समय शिव महिम्नस्तोत्र का पाठ चलता रहे। यदि महिम्नस्तोत्र पढ़ने में आपको कठिनाई हो तो किसी पंडित से अभिषेक करवाएं। या फिर केवल महामृत्युंजय मंत्र की 1008 आवृत्ति करते हुए भी शहद से अभिषेक कर सकते हैं।
दूसरा सोमवार : 29 जुलाई
श्रावण का दूसरा सोमवार 29 जुलाई का है। इस दिन धन प्राप्ति और जीवन में तरक्की के उपाय किए जाना चाहिए। इसी दिन सोम प्रदोष व्रत और अमृत सिद्धि योग भी है इसलिए यह दिन विशेष फल प्रदायक है। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक गन्न्े के रस या केसर मिले हुए गाय के दूध से करने से आर्थिक संकटों का पूर्ण और निश्चित समाधान होता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में तरक्की होती है। यह कर्जमुक्ति का भी सबसे बड़ा और सशक्त उपाय है। अभिषेक के समय रूद्र पाठ अवश्य करें।

तीसरा सोमवार : 5 अगस्त
श्रावण का तीसरा सोमवार 5 अगस्त को है। इस दिन नाग पंचमी है और इसी दिन से सोलह सोमवार व्रत भी प्रारंभ किए जाते हैं, जिन्हें संकट सोमवार कहते हैं। इस दिन निराहार रहते हुए शिव भक्ति में लीन रहा जाता है। इस दिन पंचामृत से शिवजी का अभिषेक करना विशेष फलदायी रहता है। अभिषेक के बाद बिल्व पत्र, धतूरा, बेल, आंक के फूल शिवजी को अवश्य अर्पित करें। अभिषेक करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें।
चौथा सोमवार : 12 अगस्त
श्रावण का चौथा और अंतिम सोमवार 12 अगस्त को है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक केसर के दूध से करने से दांपत्य जीवन में आ रही सारी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है वे भी यह प्रयोग करें और जो अपने मनचाहे साथी से विवाह करना चाहते हैं उन्हें तो अवश्य ही यह प्रयोग करना चाहिए। केसर के दूध से अभिषेक करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन कर्ज मुक्ति के लिए काले पत्थर के शिवलिंग पर लाल मसूर की दाल भी चढ़ाई जाती है। अभिषेक करते समय रूद्राष्टक का पाठ करें।

सोमवार व्रत के नियम
- सोमवार का व्रत करने के लिए शास्त्रों में कुछ नियम बनाए गए हैं, उनका पालन अवश्य करें।
- व्रती इस दिन इंद्रिय संयम रखें। किसी को अपशब्द न कहें। झूठ न बोले, किसी का अपमान न करें। काम, क्रोध, लोभ, मोह से दूर रहे।
- पूरे दिन भगवान शिव में ध्यान लगाए रहे। ऊं नम: शिवाय मंत्र का मानसिक जाप करता रहे।
- इस दिन दान धर्म का भी विशेष महत्व है। श्रद्धानुसार गरीबों को फलों का दान करें।
- सोमवार का व्रत करने से जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं और लंबे समय से रूके हुए काम भी होने लगते हैं।
- आर्थिक संकटों का नाश होता है। कार्य व्यवसाय में किसी प्रकार की हानि नहीं होती है। लाभ प्राप्त होता है।
- अविवाहित युवक-युवतियां यदि सोमवार का व्रत करें तो उन्हें शीघ्र योग्य जीवनसाथी मिलता है।
- सोमवार की पूजा से आयु और आरोग्यता प्राप्त होती है।
व्रत का लाभ












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