जानिए रामचरित मानस के श्लोकों और दोहों का अद्भुत चमत्कार
लखनऊ। हिन्दू धर्म का सबसे चर्चित और प्रसिद्ध ग्रन्थ रामायण सुलभ व सरल है। जिसे आप आसानी से पढ़ और समझ सकते है। गोस्वामी तुलसीदास ने राममय होकर श्री रामचन्द्र जी के चरित्र का बखूबी से रामचरित मानस में वर्णन किया है।
रामचरित मानस में राम शब्द 1443 बार आया है, सीता शब्द 147 बार आया है, इसमें श्लोक संख्या 27 है, मानस में चौपाई संख्या 4608 है, मानस में दोहा 1074 है, मानस में सोरठा संख्या 207 है और मानस में 86 छन्द है। आईये आज हम आपको रामचरित मानस के कुछ ऐसी चौपाई और दोहों के बारें में बता रहा हूॅ, जिन्हे यदि विधिपूर्वक जाप करेंगे तो आपकी विभिन्न प्रकार की भौतिक मनोकामनायें पूर्ण होंगी।

विधि-विधान
किसी भी शुभ समय में अथवा नवरात्रि में आप घर में ही किसी एकान्त स्थल को साफ करके ऑटे से अष्टदल बनायें। उसके मध्य एक स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उस पर बाजोट रखकर लाल वस्त्र बिछायें। प्रभु राम की तस्वीर को स्थान दें। बगल में रामरक्षाकवच यन्त्र स्थापित करें। रोली से तस्वीर व यन्त्र पर तिलक लगायें। शुद्ध देशी घी का दीपक जलाकर रूद्राक्ष की माला से सामथर्य अनुसार मन्त्र जाप करें। अन्तिम अर्थात नवें दिन आपने जिस मन्त्र का जाप किया है, उसका दशांश हवन करें। तत्पश्चात ब्राहम्णों को भोजन कराकर दक्षिणा दें। कुछ समय में ही आपको चमत्कारिक लाभ मिलेगा।

मंत्र
- नौकरी प्राप्ति के लिए: बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।
- रोग से मुक्ति हेतु: दैहिक दैविक भौतिक तापा राम राज नहिं काहुहि व्यापा।।
- धन प्राप्ति के लिए- जिमि सरिता सागर महुं जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
- खोई हुयी वस्तु पाने हेतु- गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रधुराजू।।
- विद्या प्राप्ति के लिए- गुरूगृह गये पढ़न रधुराई। अल्पकाल विद्या सब पाई।।
- ज्ञान प्राप्ति के लिए-छिति जल पावक गगन समीरा, पांच रचित अति अधम सरीरा।।
- विवाह हेतु- तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साज संवारि कै। मांडवी श्रुतिकीरित उरमिला कुंअरि लई हंकारि कै।।
- पुत्र प्राप्ति हेतु- प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर ज्ञान।
- मुकदमा में विजय के लिए- पवन तनय बल पवन समाना। बुधि विवके बिग्यान निधाना।।
- परीक्षा में सफलता हेतु- जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजरि नचावहि बानी।
- प्रसद्धि पाने के लिए-साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।।
- मनोकामना सिद्धि हेतु- भव भेषज रधुनाथ जसु सुनिंह जे नर अरू नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करिह त्रिसरारि।।

धन प्राप्ति के लिए

ज्ञान प्राप्ति के लिए













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