आगे आओ देश बचाओ, देश बचाओ मोदी लाओ

गुजरात में अपने विकास कार्यों के कारण आज नरेंद्र मोदी पूरे देश की आवाज बन चुके हैं। भारत का युवा उनमें अपने सपने देखता है। उन्‍हें नई सोंच और नई उम्‍मीद के साथ भाजपा के चुनाव प्रचार समिति की कमान दी गई है।

यह कविता विख्‍यात हिंदी कवि मैथिली शरण द्वारा लिखी गई है। जिसमें उन्‍होने भारत के गौरव को याद किया है।

Poem of Maithili Sharan Gupt

आर्य

हम कौन थे, क्‍या हो गये हैं, और क्‍या होंगे अभी
आओ विचारें आज मिलकर, यह समस्‍याएं सभी
भूलोक का गौरव, प्रकृति का पुण्‍य लीला स्‍थल कहां
फैला मनोहर गिरि हिमालय, और गंगाजल कहां
संपूर्ण देशों से अधिक, किस देश का उत्‍कर्ष है
उसका कि जो ऋषि भूमि है, वह कौन, भारतवर्ष है

यह पुण्‍य भूमि प्रसिद्ध है, इसके निवासी आर्य हैं
विद्या कला कौशल सबके, जो प्रथम आचार्य हैं
संतान उनकी आज यद्यपि, हम अधोगति में पड़े
पर चिन्‍ह उनकी उच्‍चता के, आज भी कुछ हैं खड़े

वे आर्य ही थे जो कभी, अपने लिए जीते न थे
वे स्‍वार्थ रत हो मोह की, मदिरा कभी पीते न थे
वे मंदिनी तल में, सुकृति के बीज बोते थे सदा
परदु:ख देख दयालुता से, द्रवित होते थे सदा

संसार के उपकार हित, जब जन्‍म लेते थे सभी
निश्‍चेष्‍ट होकर किस तरह से, बैठ सकते थे कभी
फैला यहीं से ज्ञान का, आलोक सब संसार में
जागी यहीं थी, जग रही जो ज्‍योति अब संसार में

वे मोह बंधन मुक्‍त थे, स्‍वच्‍छंद थे स्‍वाधीन थे
सम्‍पूर्ण सुख संयुक्‍त थे, वे शांति शिखरासीन थे
मन से, बचन से, कर्म से, वे प्रभु भजन में लीन थे
विख्‍यात ब्रहमानंद नद के, वे मनोहर मीन थे।


भारत माता का मंदिर यह

भारत माता का मंदिर यह
समता का संवाद जहॉ,
सबका शिव कल्‍याण यहॉ है
पावें सभी प्रसाद यहॉ।

जाति-धर्म या संप्रदाय का,
नहीं भेद-व्‍यवधान यहां,
सबका स्‍वागत, सबका आदर
सबका सम सम्‍मान यहॉ।
राम, रहीम, बुद्ध, ईसा का,
सुलभ एक सा ध्‍यान यहॉ,
भिन्‍न-भिन्‍न भव संस्‍कृतियों के
गुण गौरव का ज्ञान यहॉ।

नहीं चाहिए बुद्धि बैर की
भला प्रेम का उन्‍माद यहॉ
सबका शिव कल्‍याण यहॉ है,
पावें सभी प्रसाद यहॉ।

सब तीर्थों का एक तीर्थ यह
ह्रदय पवित्र बना लें हम
आओ यहॉ अजातशत्रु बन,
सबको मित्र बना लें हम।

रेखाएं प्रस्‍तुत हैं, अपने
मन के चित्र बना लें हम।
सौ-सौ आदर्शों को लेकर
एक चरित्र बना लें हम।

बैठो माता के ऑगन में
नाता भाई-बहन का
समझे उसकी प्रसव वेदना
वही लाल है माई का
एक साथ मिल बॉट लो
अपना हर्ष विषाद यहॉ
पावें सभी प्रसाद यहां।

मिला सेव्‍य का हमें पुजारी
सकल काम उस न्‍यायी का
मुक्ति लाभ कर्तव्‍य यहॉ है
एक एक अनुयायी का
कोटि-कोटि कंठों से मिलकर
उठे एक जयनाद यहॉ
सबका शिव कल्‍याण यहॉ है
पावें सभी प्रसाद यहॉ।

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