शुरू हुई मां दुर्गा की पूजा, जानिए इस नवरात्र का विशेष महत्व

[पं. अनुज कुमार शुक्ल] संस्कृत व्याकरण के अनुसार नवरात्रि कहना त्रुटिपूर्ण है। नौ रात्रियों का समूह होने के कारण इसमें द्वन्द समास का बोध होता है, जिस कारण यह शब्द पुलिंग रूप ‘‘नवरात्र'' में ही विशुद्ध माना जायेगा। पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक वर्ष में 4 सन्धियाॅ होती है। इन चारों सन्धियों में नवरात्र पड़ते है। जिसमें दो गुप्त नवरात्र होते है जो आमतौर पर प्रचलित एंव महत्वपूर्ण नहीं माने गये है।

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मार्च और सितम्बर के महीने में पड़ने वाले नवरात्र का अधिक माहत्म्य शास्त्रों में बताया गया है क्योंकि यह नवरात्र गोल सन्धियों में पड़ते है। इस समय रोगाणु आक्रमण की प्रबल सम्भावना रहती है। ऋतु सन्धियों में रोगाणु अधिक बलवान होकर हमारे स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते है। शरीर को स्वस्थ्य व शुद्ध बनायें रखने वाली प्राकृतिक ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए नवरात्र से बेहतर कोई अवसर नहीं मिलेगा।

कैसें करें मां दुर्गा को प्रसन्न-

  • नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • पूजन में लाल रंग के आसन का प्रयोग करें।
  • पूजन के पश्चात आसन के नीचे जल छिड़कर आसन को प्रणाम करें।
  • पूजन के समय लाल वस्त्रों का ही प्रयोग करें जिससे शरीर में उर्जा का संचरण होता है।
  • मां को भोग में शहद मिला दूध अर्पित करें।
  • नावार्ण मन्त्र-'' ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै '' की कम से कम एक माला जाप अवश्य करें।
  • अष्टमी व नवमी को कन्याओं विधिवत पूजन व श्रंगार अवश्य करें।
  • मां को गुड़ का भोग लगायें।
  • नवमी के दिन घर में रखी पुस्तके, संगीत यन्त्र, कलम आदि की पूजा करना अत्यन्त शुभ रहता है।
  • ध्यान रखें- माॅ भगवती को तुलसी दल व दूर्वा कदापि न चढ़ायें।
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