Chandraghanta Mata ka Bhog: मां चंद्रघंटा को क्या है पसंद? इन चीजों का लगाएं भोग
Chandraghanta Mata ka Bhog: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा होती है। मां का ये रूप बहुत ही सरस और कोमल है। इनकी पूजा करने से इंसान के सारे कष्टों को अंत होता है और सुख की प्राप्ति होती है। जो भी मां की पूजा सच्चे मन से करता है उसकी सारी मनोकामना पूरी होती है। इनके माथे पर चंद्रमा के समान घंट है और इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है।

मां चंद्रघंटा को लगाए भोग
यूं तो मां को भक्तगण जो भी श्रद्धा के साथ परोसते हैं, मां बड़े ही प्रेम से स्वीकार करती हैं लेकिन मां को दूध और केसर बने व्यंजन काफी प्रिय हैं। आप इन्हें मिल्क से बनने वाली मिठाईयों का भोग लगा सकते हैं। माता को फलों और केले का भी भोग लगाया जाता है। जो भी मां की पूजा सच्चे मन से करता है उन्हें मां दोनों हाथों से आशीष देती हैं।
मां चंद्रघंटा के मंत्र
- "या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।"
- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
- या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
- या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
मां चंद्रघंटा की आरती
- जय मां चंद्रघंटा सुख धाम
- पूर्ण कीजो मेरे काम
- चंद्र समान तू शीतल दाती
- चंद्र तेज किरणों में समाती
- क्रोध को शांत बनाने वाली
- मीठे बोल सिखाने वाली
- मन की मालक मन भाती हो
- चंद्र घंटा तुम वरदाती हो
- सुंदर भाव को लाने वाली
- हर संकट मे बचाने वाली
- हर बुधवार जो तुझे ध्याये
- श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय मूर्ति
- चंद्र आकार बनाएं सन्मुख घी की ज्योत जलाएं
- शीश झुका कहे मन की बात
- पूर्ण आस करो जगदाता
- कांची पुर स्थान तुम्हारा
- करनाटिका में मान तुम्हारा नाम
- तेरा रटू महारानी
- 'भक्त' की रक्षा करो भवानी।












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