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आखिर क्या है माला के 108 मनकों का रहस्य?

नई दिल्ली। भारतीय पूजा पद्धति में ध्यान यानि मेडिटेशन को सबसे ज्यादा प्रभावी और महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ध्यान की अतल गहराइयों में उतरने के बाद आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार हो जाता है। यह भक्त की भगवान से संवाद स्थापित करने की राह मानी जाती है। धर्मशास्त्रों में कितने ही मनुष्यों, देवताओं और असुरों तक का वर्णन मिलता है, जिन्होंने वर्षों तपस्या कर, ध्यान लगाकर परमात्मा के साक्षात दर्शन और मनचाहे वरदान पाए। अर्थात ध्यान एक ऐसी शक्ति है, जो भगवान को भी प्रकट होने पर विवश कर देती है।

ध्यान लगाना, मन को एकाग्र करना थोड़ा कठिन कार्य माना जाता है क्योंकि मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है। ध्यान में बैठने के बाद भी वह कई स्तरों पर कहीं ना कहीं भटकता रहता है। इस मन को साधने के लिए हिंदू धर्म पद्धति में ध्यान के साथ माला जपने का नियम बनाया गया है।

ध्यान लगाने के लिए कई तरह की मालाएं उपलब्ध हैं

ऐसा माना जाता है कि माला के मनके गिनने के साथ जाप को समाहित कर देने से उतनी देर के लिए मन बंध जाता है और भटकने नहीं पाता। ध्यान लगाने के लिए कई तरह की मालाएं उपलब्ध हैं और सभी में एक बात समान है- उनके दानों की संख्या यानि ध्यान लगाने के लिए माला आप कोई भी लें, उसमें 108 मनके या दाने या मोती ही होते हैं।

क्यों, आइये जानते हैं-

माला का चयन

माला का चयन

माला के संबंध में एक बात जान लें कि आप किन ईष्ट देव का ध्यान करने जा रहे हैं, उसी के अनुरूप माला का चयन किया जाना चाहिए। जाप करने के लिए बाजार में रूद्राक्ष, तुलसी, वैजयंती, स्फटिक, मोतियों या विभिन्न मणियों से बनी मालाएं उपलब्ध हैं। इनमें से हर माला का अलग प्रभाव है और हर देव की सिद्धि के लिए एक माला निर्दिष्ट है। इन मालाओं में विशेष प्रकार की चुंबकीय और विद्युतीय तरंगे होती हैं, जो जाप करने के साथ साधक के शरीर और आस-पास के वातावरण में विस्तारित होती हैं। इसीलिए पूरी जानकारी के बाद ही जाप की माला का चुनाव किया जाना चाहिए।

रूद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ

रूद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ

यदि आप बिना किसी विशेष उद्देश्य के केवल मन की शांति के लिए ध्यान लगाना चाहते हैं तो इसके लिए रूद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ है। रूद्राक्ष की माला को फेरने से वातावरण में चुंबकीय और विद्युतीय के साथ कीटाणुनाशक तरंगें भी निकलती हैं। यह साधक के साथ-साथ उसके आस-पास के वातावरण को भी स्वस्थ और बीमारियों से रहित बनाती हैं।

अब चर्चा करते हैं कि माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं?

अब चर्चा करते हैं कि माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं?

हमारे ज्ञानी साधुजनों ने धार्मिक कार्यों में उपयोग की जाने वाली हर वस्तु को अनंत वैज्ञानिक शोध के बाद निर्दिष्ट किया है। पूजा की हर वस्तु उससे निकलने वाली तरंगों और प्रकृति पर पड़ने वाले उसके प्रभाव के अनुरूप मान्य की गई हैं। जाप की माला के लिए भी प्रकृति के विभिन्न ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों की गणना करके ही मनकों की संख्या निर्धारित की गई है। माला के 108 मनके की संख्या का आधार यह गणना है- ब्रह्मांड में नवग्रहों को ज्योतिषीय गणना में लिया गया है।

कुल 12 राशियां निर्धारित

कुल 12 राशियां निर्धारित

इसी तरह समस्त व्यक्तियों के भाग्यफल के अध्ययन के लिए कुल 12 राशियां निर्धारित की गई हैं। अब 9 ग्रहों और 12 राशियों को गुणा यानि मल्टीप्लाय किया जाए तो जो संख्या सामने आती है, वह है 108। इसी प्रकार भारतीय पंचांग 27 नक्षत्रों की भी गणना करता है।

 हर नक्षत्र के 4 चरण माने गए हैं

हर नक्षत्र के 4 चरण माने गए हैं

हर नक्षत्र के 4 चरण माने गए हैं। अब 27 को भी 4 से गुणित या मल्टीप्लाय करें तो संख्या 108 ही आती है। इसका सूक्ष्म अर्थ यह है कि जब कोई साधक माला फेर रहा होता है, तो वह अपने हर स्पर्श से ब्रह्मांड के 9 ग्रहों, 12 राशियों और 27 नक्षत्रों को जागृत कर रहा होता है। यही कारण है कि नियमित रूप से, पवित्र मन से, पूरे ध्यान से माला फेरने से चमत्कारिक प्रभाव सामने आते हैं।

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