Laxmi Puja: आज बना पुष्य संयोग, लक्ष्मी को प्रसन्न करें और पाएं धन-लाभ
आज का पुष्य संयोग विशिष्ट है। इस दिन श्रीयंत्र की पूजा का विधान है। माता लश्र्मी अपने भक्तों के सारे कष्ट दूर कर देती हैं।

Laxmi Puja in Pushya Nakshatra: नव संवत्सर 2080 का पहला पुष्य नक्षत्र आज है , जिसके कारण कई विशेष योग संयोग बने हुए हैं इसलिए यह दिन लक्ष्मी प्राप्ति के लिए अचूक दिन बन गया है। चैत्र मास की दशमी के दिन शुक्रवार, पुष्य नक्षत्र, सुकर्मा योग, रवियोग रहेगा। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का दिन है और पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि, देवता बृहस्पति हैं, इस कारण इस दिन स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पुष्य नक्षत्र रात्रि में 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगा, सुकर्मा योग रात्रि 1.54 तक और रवियोग सूर्योदय से रात्रि 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
कैसे करें श्रीयंत्र या श्रीचक्र की पूजा
शुक्र-पुष्य, रवियोग में श्रीयंत्र पूजा साधना करने का विधान है। इस दिन श्रीयंत्र की पूजा करने से स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। इस दिन सायंकाल श्रीचक्र की पूजा की जाती है। पूजा के लिए अपने घर के पूजा स्थान में उत्तरमुखी होकर लाल कपड़े के आसन पर बैठें। एक चौकी पर श्रीयंत्र स्थापित करें। श्रीयंत्र को गंगाजल से स्नान करवाकर इस पर केसर की बिंदी लगाएं। पूजा में लाल कमल पुष्प उपयोग करें। लाल कमल न मिले तो लाल रंग का कोई अन्य पुष्प अर्पित कर सकते हैं। केसर की धूप लगाएं। देसी घी का दीपक लगाएं। मखाने की खीर का नैवेद्य लगाएं और श्रीसूक्त का पाठ करें। कर्पूर से आरती कर प्रसाद ग्रहण करें। पूजन के बाद श्रीयंत्र को अपने पूजा स्थान में ही रखे रहने दें।
श्रीयंत्र पूजा के लाभ
- शुक्र-पुष्य में श्रीयंत्र की पूजा स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति का मार्ग खोलती है।
- श्रीयंत्र की पूजा से भूमि, भवन की प्राप्ति होती है।
- कार्य-व्यवसाय में उन्नति होती है। बाधाएं दूर होती हैं।
- फंसा हुआ पैसा लौटने लगता है।
- जिन लोगों को बार-बार आर्थिक हानि उठानी पड़ती है, वे श्रीयंत्र का पूजन अवश्य करें।












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