Kalkut Yog Aaj: आज इस वक्त ना करें कोई भी शुभ काम, वरना होंगे घातक परिणाम
Kalkut Yog Aaj: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के दिन कालकूट योग आया है। यह योग तब बनता है जब कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन गुरुवार, विष्कुंभ योग और भद्रा पड़े। इन तीनों के संयोग से कालकूट योग बनता है। इस योग में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। मान्यता है कि जब कालकूट योग में कोई शुभ कार्य किया जाता है तो उसके विपरीत परिणाम प्राप्त होते हैं और वह कार्य सफल नहीं होता।
आज विष्कुंभ योग सूर्योदय पूर्व से लेकर रात्रि 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही भद्रा दोपहर 2 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ होकर रात्रि 1 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार कालकूट योग दोपहर 2:22 से रात्रि 9:48 बजे तक रहेगा। इस बीच कोई भी शुभ कार्य या किसी शुभ कार्य के लिए यात्राएं करना वर्जित रहेगा।

सर्वाधिक अशुभ योगों में से एक है कालकूट योग
कालकूट योग का प्रभाव कालकूट योग सर्वाधिक अशुभ योगों में से एक है। यह कृष्णपक्ष में ही भद्रा के साये में बनता है। इस योग में किए गए शुभ कार्य हमेशा उल्टे प्रभाव देते हैं। यह योग पड़े तो मुंडन, सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीदी, दुकान प्रारंभ, फैक्ट्री प्रारंभ, शुभ यात्रा, धार्मिक कार्य आदि नहीं किए जाते हैं।
भयंकर अशुभ प्रभावों का सामना करना पड़ता है
यदि ये कार्य किए जाते हैं तो भयंकर अशुभ प्रभावों का सामना करना पड़ता है। इस योग के बारे में तो यहां तक कहा जाता है कि यदि इस समय में किसी बालक का जन्म सर्जरी से होने वाला है तो यदि संभव हो तो उसे टाला जाना चाहिए। यदि जान पर बन रही हो तब यह योग देखने की आवश्यकता नहीं है।
कालकूट योग में क्या करें
इस योग के दौरान शिवजी, हनुमानजी और देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप करना सबसे शुभ माना जाता है।
इस योग में रुद्राक्ष की माला से ऊं मृत्युंजयाय नम: का जाप करने से पाप कष्ट दूर हो जाते हैं।
कालकूट योग में गरीबों को अन्न दान करने से योग के दुष्प्रभाव दूर हो जाते हैं।
यह जरूर करें
यदि पता नहीं हो इस योग के बारे में और इस दौरान कोई शुभ कार्य कर ही लिया तो क्या होगा। डरने या किसी शंका-कुशंका की आवश्यकता नहीं है। इस योग के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए शास्त्रीय विधान भी बताए गए हैं। यदि भूलवश कालकूट योग में कोई शुभ काम प्रारंभ कर लिया तो आपको एक काम करना है। एक मिट्टी के कलश में सरसों का तेल भरकर, उसमें काले तिल और काले उड़द के दाने डालें। इस मिट्टी के कलश को मिट्टी के ही ढक्कन से बंद करें और किसी सुनसान जगह में जाकर जमीन में एक फीट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें दबाकर आ जाएं।
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