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Jyeshtha Purnima 2018: अधिकमास की पूर्णिमा पर घर लाएं धन खींचने वाला पौधा

नई दिल्ली। अधिकमास में धार्मिक कार्य, अनुष्ठान, जप-तप, पूजा, यज्ञ, हवन, दान, भागवतकथा श्रवण आदि का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं अधिकमास विभिन्न् प्रकार की तंत्र सिद्धियों के लिए भी जाना जाता है। जो लोग तंत्र क्रियाओं में रुचि रखते हैं या तंत्र के बारे में पढ़ रहे हैं या जल्द से जल्द अपने जीवन की समस्याओं का समाधान चाहते हैं उन्हें यह पूरा लेख बहुत ध्यान से पढ़ना चाहिए।

अधिकमास की पूर्णिमा 29 मई को

अधिकमास की पूर्णिमा 29 मई को

वैसे तो तांत्रिक सिद्धियां अमावस्या या ग्रहणकाल में की जाती हैं, लेकिन तंत्र शास्त्रों में अधिकमास की पूर्णिमा भी इन सिद्धियों के लिए श्रेष्ठ दिन बताया गया है। अधिकमास प्रत्येक तीन वर्ष में आता है इसलिए सिद्धियां प्राप्त करने के इच्छुक लोग तीन साल तक इस शुभ दिन का इंतजार करते हैं। इस बार अधिकमास की पूर्णिमा 29 मई 2018 मंगलवार को आ रही है। पूर्णिमा तिथि 28 मई को सायं 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर 29 मई को सायं 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगी।

 भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष माह

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष माह

अधिकमास भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष माह है। इस माह में लोग धन प्राप्ति के लिए कई तरह के उपाय करते हैं। तंत्र शास्त्र में विभिन्न् पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों के माध्यम से धन को अपनी ओर आकर्षित करने के उपाय बताए गए हैं। इन्हीं में से एक सिद्ध और चमत्कारिक पौधा है सहदेवी का। गांवों में इसे सहदेई भी कहा जाता है। सहदेवी एक छोटा सा कोमल पौधा होता है, जो एक फुट से साढ़े तीन फुट तक की ऊंचाई का होता है। पौधा भले ही छोटा और कोमल है पर तंत्र शास्त्र और आयुर्वेद में ये किसी महारथी से कम नहीं है। अपने दिव्य गुणों के कारण आयुर्वेद के अनेक ग्रंथों के साथ अथर्ववेद में इसका उल्लेख प्रमुखता से मिलता है। यह पौधा विभिन्न् बीमारियों में तो काम आता ही है, तंत्र शास्त्र में इसे धन खींचने वाला पौधा कहा गया है।

कैसे लाएं घर

कैसे लाएं घर

सहदेवी के पौधे को घर लाने के लिए वैसे तो रवि-पुष्य का संयोग होना शुभ माना गया है, लेकिन अधिकमास की पूर्णिमा के दिन इसे लाना सोने पर सुहागे की तरह हो जाता है। पूर्णिमा से एक दिन पहले चतुर्दशी की सायंकाल में सहदेवी के पौधे को निमंत्रण देकर आएं कि कल प्रात: हम आपको लेने आएंगे। अगले दिन यानी पूर्णिमा के दिन सूर्योदय पूर्व पौधे को गंगाजल से स्नान कराकर धीरे से उखाड़कर घर ले आएं। फिर पंचामृत से स्नान कराकर उसकी षोडशोपचार पूजा करें। पूजा विधि किसी भी कर्मकांड की पुस्तक में मिल जाएगी। इस पौधे की पत्तियां, तने और जड़ का विभिन्न् कार्यों में प्रयोग किया जाता है।

इन कार्यों में दिखाएगा चमत्कार

इन कार्यों में दिखाएगा चमत्कार

  • तंत्र शास्त्र में सहदेवी धन खींचने वाले पौधे के नाम से विख्यात है। इस पौधे की सिद्ध की हुई जड़ को लाल रेशमी चमकदार कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखने से धन की कभी कमी नहीं होती और लगातार बढ़ता जाता है।
  • रसोईघर या अनाज के भंडारण घर में यदि सहदेवी की जड़ को शुद्ध स्थान पर रखा जाए तो कभी अन्न् की कमी नहीं होती।
  • यह पौधा वास्तुदोष निवारक का काम भी करता है। घर के पूजन कक्ष में सहदेवी की स्थापना करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • यदि आप कोर्ट-कचहरी या किसी अन्य विवाद में फंस गए हों और फैसला आने वाला है तो इसकी सिद्ध की हुई जड़ धारण करके जाएं, निश्चित ही विजय मिलेगी।
  • इसके पंचांग का चूर्ण बनाकर तिलक करने से तीव्र आकर्षण होता है। सभा में इसका तिलक लगाकर जाने से लोग आपके वशीभूत रहेंगे।
  • सहदेवी के पौधे के पंचांग का चूर्ण जिव्हा पर लगाकर बोलने से वाक सिद्धि होती है। हजारों लोग आपको अपलक सुनते रहेंगे।
  • इस पौधे की जड़ से बना काजल लगाकर जिसके सामने जाएंगे वह आपकी ओर आकर्षित हो जाएगा।
  • सहदेवी के पौधे को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर जिसे पान में डालकर खिला देंगे, वह आपके वशीकरण पाश में बंध जाएगा।
  • सहदेवी की जड़ को बांह पर बांधने से समस्त प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं।

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