Janmashtami 2021: क्यों कृष्ण के पहले आता है राधा का नाम, क्या है Radhe Krishna का अर्थ?
नई दिल्ली, 30 अगस्त। आज पूरे देश में जन्माष्टमी का पर्व धूम-धाम से मनाया जा रहा है। मथुरा समेत देश के सभी कृष्ण मंदिरों में आज सुबह से ही 'राधे-कृष्ण' के जयकारे गूंज रहे हैं। कृष्ण का प्रेम अलौकिक है लेकिन ये प्रेम तब तक अधूरा है, जब तक कि कृष्ण संग राधा का नाम नहीं जुड़ता है। राधा ने कृष्ण से बिना शर्त के प्रेम किया था। राधा के निस्वार्थ प्रेम के चलते ही खुद परमेश्वर को कहना पड़ा था मैं तुम्हारे बिना कभी पूरा नहीं हो सकता है इसलिए भले ही हम साथ-साथ नहीं हो पाए लेकिन संसार में मेरा नाम तुम्हारे नाम के बाद ही लिया जाएगा। और इसी वजह से संसार में राधे-कृष्ण कहने की प्रथा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि राधे-कृष्ण का क्या अर्थ होता है?
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नहीं तो चलिए आपको बताते हैं कि क्या है इस सुंदर से शब्द का दिल छू लेने वाला मतलब?

Radhe Krishna का क्या अर्थ है?
- Radhe मतलब यानी की Rah de यानी कि राह+ दे= मतलब रास्ता दीजिये जिसे कि अंग्रेजी में कहते हैं give direction
- Krishna शब्द बना है KRU+ Shan, KRU हिंदी का शब्द है, जिसका अर्थ होता है परम जिसे कि अंग्रेजी में कहते हैं absolute
- shan का मतलब हिंदी में होता है 'खुशी'
- इसका मतलब Radhe Krishna का अर्थ हिंदी में हुआ-परम सुख और खुशी वाला रास्ता दीजिये, जिसे कि अंग्रेजी में कहेंगे कि (Give Direction for absolute happiness)

कौन थीं राधा-रानी?
कहते हैं कि राधा भी ब्रज की गोपी थीं, जो अन्य गोपियों की ही तरह ही श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं। वो उम्र में कृष्ण से थोड़ी सी बड़ी थीं लेकिन बहुत सुंदर थीं। कृष्ण को भी राधा से ही लगाव था। वो सारी गोपियों संग रास रचाते थे लेकिन प्रेम उन्होंने राधा से ही किया था।
भक्त और भगवान की शादी कैसे संभव हो सकती है?
हालांकि पौराणिक कथाओं में राधा के बारे में कुछ खास लिखा नहीं है लेकिन मंदिरों के प्रमाण और ब्रज की कहानियों से पता चलता है कि राधा का अस्तित्व था। कुछ लोग कहते हैं कि कृष्ण की लीलाओं से राधा का एहसास हो गया था कि कृष्ण ही भगवान के अवतार हैं और ऐसे में एक भक्त और भगवान की शादी कैसे संभव हो सकती है इसलिए राधा ने कृष्ण से कभी शादी नहीं की।

... इसलिए राधे-कृष्ण बोला जाता है
हालांकि कुछ कथाएं ये भी कहती हैं कि राधा और कृष्ण ने प्रेम को सर्वोपरी रखने का संदेश दिया है , वो प्रेम जो किसी बंधन में नहीं बंध सकता है। प्रेम अविरल है और नदी की धारा की तरह पवित्र है, शादी तो वचनों का बंधन है, ऐसे में राधाऔर कृष्ण की शादी कैसे हो सकती थी इसलिए दोनों प्रेमी-प्रेमिका के रूप में जगत में जाने गए और प्रेम के ही कारण राधा को कृष्ण ने अपने आगे का स्थान दिया है और इसलिए राधे-कृष्ण बोला जाता है कि ना कि कृष्ण-राधे।

जन्माष्टमी : तिथि और शुभ मुहूर्त
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 29 अगस्त 2021 रात 11:25 से
- अष्टमी तिथि समाप्त: 31 अगस्त को सुबह 01:59 तक
- रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 30 अगस्त को सुबह 06 बजकर 39 मिनट
- रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 31 अगस्त को सुबह 09 बजकर 44 मिनट
- अभिजित मुहूर्त: - 30 अगस्त सुबह 11:56 से लेकर रात 12:47 तक
- गोधूलि मुहूर्त: - 30 अगस्त शाम 06:32 से लेकर शाम 06:56 तक












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