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Jagannath Rath Yatra 2025: 500 रसोईए मिलकर तैयार करते हैं 56 भोग,जानिए क्या है 'महाप्रसाद' की विधि और महत्व?

Jagannath Rath Yatra 2025: भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र त्योहारों में से एक रथ यात्रा 2025 की शुरुआत आज से हो गई है, इसे 'गुंडिचा यात्रा 'भी कहते हैं। कहते हैं कि जो भी व्यक्ति इस यात्रा का हिस्सा बनता है, उसके सारे कष्टों को अंत होता है और उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

ये अकेली पूजा है, जिसमें प्रभु जगन्नाथ की पूजा उनके भाई-बहन यानी कि बलराम और सुभद्रा के साथ होती है। इस पूजा का मुख्य आकर्षण रथ और महाप्रसाद है जो कि विशेष ढंग से तैयार किए जाते हैं।

Jagannath Rath Yatra 2025

आपको बता दें कि विश्वप्रसिद्ध 'जगन्नाथ रथयात्रा' में हर रोज भगवान को 56 तरह का भोग लगता है, जिसे कि बेहद ही पारंपरिक ढंग से बनाया जाता है।

500 रसोईए मिलकर तैयार करते हैं प्रभु का 'महाप्रसाद'

इन्हीं भोगों को जब भगवान को चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है, तो उसे 'महाप्रसाद' कहा जाता है। यह सामान्य प्रसाद से भिन्न होता है क्योंकि इसे स्वयं भगवान का आशीर्वाद माना जाता है।

पुरी मंदिर में हर रोज प्रभु को 6 बार भोग लगता है

मालूम हो कि पुरी मंदिर में हर रोज प्रभु को 6 बार भोग लगता है, जो कि खास रसोई में पकाया जाता है। इस रसोई में 500 रसोईए और 300 सहायक काम करते हैं, जो कि लकड़ी के चूल्हे पर 9 बर्तन रखकर प्रसाद तैयार करते हैं। सारे बर्तन मिट्टी के बने होते हैं, जिन्हें कि शुभता का प्रतीक माना जाता है, प्रसाद पकाने के बाद मिट्टी के बर्तनों को मिट्टी में ही गाड़ दिया जाता है।

महाप्रसाद की खास बातें (Jagannath Rath Yatra 2025)

  • महाप्रसाद को मां अन्नपूर्णा की कृपा भी माना जाता है और इसे खाने से समस्त पापों का क्षय होता है।
  • महाप्रसाद को मंदिर परिसर के 'आनंद बाज़ार' में सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर ग्रहण करते हैं। यह सामाजिक समरसता और समानता का प्रतीक है।
  • महाप्रसाद में चावल, दाल, सब्जियां, मिठाइयां, पुरी, खिचड़ी, दही, खीर, और पकोड़े जैसी अनेक व्यंजन होते हैं। यह शुद्ध देसी घी में पकाए जाते हैं।
  • रथ यात्रा के दौरान विशेष प्रकार के भोग जैसे 'पोड़ पिठा', 'खाजा', और 'मालपुआ' तैयार किए जाते हैं, जो रथों पर विराजमान भगवानों को अर्पित किए जाते हैं और फिर श्रद्धालुओं में बांटे जाते हैं।
  • ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के समय महाप्रसाद का एक कण भी व्यक्ति को मोक्ष दिला सकता है।

Disclaimer: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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