Jagannath Rath Yatra 2023: रथ यात्रा की पूजा में क्यों होती हैं सुभद्रा? क्यों नहीं होती राधा या रुक्मिणी?
Jagannath Rath Yatra Mysterious facts in Hindi: विश्वप्रसिद्ध 'जगन्नाथ रथ यात्रा 2023' आज से प्रारंभ हो चुकी है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में इस वक्त आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस यात्रा में शामिल होने के बाद इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आपको बता दें कि ये विश्व में इकलौती ऐसी पूजा है, जिसमें श्री कृष्ण यानी कि जगन्नाथ जी के साथ ना तो उनकी पत्नी रुक्मिणी होती हैं और ना ही उनकी प्रेयसी राधा, बल्कि इस पूजा में उनके साथ बड़े भाई बलराम और छोटी बहन सुभद्रा शामिल होती है। हालांकि इस बारे में कई रोचक कथाएं प्रचलित हैं।
'जगन्नाथ रथ यात्रा' से जुड़े रोचक प्रसंग
जिसमें एक सबसे प्रचलित कथा है, जहां इस बारे में काफी रोचक प्रसंग बताया गया है। दरअसल एक बार भगवान श्री कृष्ण अपने महल में सो रहे थे और उनके चरणों के पास रानी रुक्मिणी बैठी हुई थीं कि तभी करवट लेते वक्त श्री कृष्ण की मुंह से 'राधे' निकला, जिसे सुनकर रुक्मिणी को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने सोचा कि आखिर उस राधा में ऐसा क्या है, जो मुझमें नहीं, मैं इनकी सेवा में रात-दिन लगी रहती हूं इसके बावजूद भगवान निद्रा में भी उनका नाम ले रहे हैं।
कृष्ण और बलराम के लिए मां ने कही ये बात
उन्होंने ये बात सारी रानियों को बता दी, सबने मिलकर फैसला किया कि वो इस बारे में मां रोहिणी (बलराम एवम् सुभद्रा की मां) से बात करेंगी और इसके बाद वो सभी मां के कक्ष में पहुंचे और उन्हें सारी बात कह सुनाई। जिस पर मां रोहिणी ने कहा कि 'वो इस बारे में सबको विस्तार से बताएंगी लेकिन वो जब इस बारे में बात करें तो कृष्ण और बलराम दोनों को यहां नहीं आना चाहिए।'
बहन सुभद्रा बनी कक्ष की पहरेदार
जिस पर सब रानियां सहमत हो गईं और उन्होंने बहन सुभद्रा को द्वार पर खड़ कर दिया पहरा देने के लिए और राधा और कृष्ण का प्रसंग सुनाना शुरू कर दिया। लेकिन तभी सुभद्रा ने देखा भगवान श्री कृष्ण और बलदाऊ दोनों उसी कक्ष की ओर आ रहे हैं, ऐसे में सुभद्रा उन्हें रोकने के लिए कक्ष से बाहर आ गईं।
सुभद्रा, कृष्ण और बलराम का शरीर गलने लगा
लेकिन मां रोहिणी की आवाज कक्ष से बाहर आ रही थी और उनका प्रसंग इतना रोचक था कि सुभद्रा, कृष्ण और बलराम अपनी ही जगह एक मूर्ति के रूप में खड़े हो गए और जैसे-जैसे प्रसंग वो सुनते जा रहे थे उनका शरीर गलना शुरू हो गया और वो आधा गल भी गए।
नारद मुनि ने किया भगवान से निवेदन
उसी वक्त आकाश मार्ग से नारद मुनि वहां से गुजरे और वो भगवान के इस अद्भूत रूप को देखकर एकदम से हतप्रभ रह गए। उन्होंने प्रभु से प्रार्थना की उनके इस अलौकिक रूप को भक्तों को भी देखना चाहिए इसलिए वो उनके सामने इस रूप में सामने आए। प्रभु ने नारद जी की बात मान ली और अपना इसी वादा निभाने के लिए वो हर साल 'रथ यात्रा' के जरिए भक्तों को दर्शन देते हैं।
प्रभु के साथ ना तो रुक्मिणी और ना ही राधा
इसी वजह से रथयात्रा की पूजा में जगन्नाथ जी के साथ ना तो उनकी पत्नी होती है और ना ही उनकी प्रिय राधा। आपको बता दें पुरी के मंदिर में विराजमान तीनों भगवान का पूर्ण रूप नहीं है और तीनों की अधूरे रूप में ही पूजा होती है।












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