Inspirational Story: आंधियों में भी सोते रहने वाले बूढ़े चौकीदार की चतुराई

नई दिल्ली। जीवन में उतार- चढ़ाव आते रहना इतनी स्वाभाविक बात है कि शायद ही कोई इससे दो- चार ना हुआ हो। आख्रिर जीवन में रंग भी तो इसी से भरते हैं। सभी चाहते हैं कि उनके जीवन में केवल खुशियां आएं और दिक्कतें उनसे कोसों दूर रहें, पर ऐसा संभव नहीं है। जीवन है, तो मुश्किलें तो आएंगी ही। आखिर दुख और सुख चलते पहिए का नाम हैं। सुख के बाद दुख आता ही है और दुख के बाद सुख का आना भी तय है।

आंधियों में भी सोते रहने वाले बूढ़े चौकीदार की चतुराई

ऐसे में दुख की चिंता में पड़कर अपने सुखमय समय को बरबाद करना अक्लमंदी का काम नहीं है। इससे अधिक अच्छा होगा कि हम पहले से ऐसी तैयारी करें कि दुख आए भी, तो हमें मुसीबतों का सामना कम करना पड़े।

आज इसी संदर्भ में एक सुंदर कथा सुनते हैं

एक किसान था। उसके खेत ऐसे स्थान पर थे, जहां अक्सर आधियां आया करती थीं। इसी कारण वहां अक्सर तबाही हुआ करती थी। किसान का काम बढ़ता जा रहा था, तो उसने अपनी मदद के लिए एक मजदूर रखने की सोची, लेकिन वहां मजदूर मुश्किल से मिला करते थे। एक दिन किसान के पास एक बूढ़ा आदमी काम मांगने आया। किसान ने कहा कि आपकी उम्र अधिक है और मेरे यहां काम ज्यादा है। यहां आंधियां भी अधिक आती हैं, तो काम बहुत बढ़ जाता है। क्या आप इतना काम कर सकेंगे। मजदूर ने हंसकर कहा- मैं आंधियों से नहीं डरता। जब आंधियां आती हैं, मैं सोता हूं। किसान ने उसे काम पर रख लिया।

मजदूर की मेहनत से खूब अनाज पैदा हुआ

वह बूढ़ा मजदूर बहुत ही मेहनती था। उसने पूरी खेती का काम इतनी अच्छी तरह संभाल लिया कि किसान निश्चिंत हो गया। एक समय ऐसा भी आया, जब मजदूर की मेहनत से खूब अनाज पैदा हुआ और कटाई का काम भी निपट गया। मौसम अच्छा था, तो किसान भी निश्चिंत हो गया और दो- चार दिन खेत पर ना गया। पांचवे दिन रात में अचानक जबरदस्त आंधी आ गई। किसान लालटेन और एक डंडा लेकर भागता हुआ मजदूर की झोपड़ी पर पहुंचा और देखा कि वह आराम से लेटा हुआ है। किसान ने उससे कहा कि जल्दी चलो। आंधी आ गई है, सब अनाज खुले में पड़ा है, पशु सेफ नहीं हैं और तुम आराम से पड़े हो। मजदूर ने आराम से पलटकर उसकी ओर देखा और कहा- मैंने तो पहले ही कहा था कि आंधी आने पर मैं सोता हूं। किसान ने अपना सिर पीट लिया और खेत की ओर भागा। वहां पहुंचकर उसने देखा कि अनाज पहले ही खलिहान में रखा जा चुका है और सारे पशु बाड़े में बंधे हैं।

किसान को मजदूर की बात का मतलब समझ में आया

अब किसान को मजदूर की बात का मतलब समझ में आया। मजदूर के कहने का आशय यह था कि वह पहले से इतनी तैयारी रखता है कि आंधियां आने पर उसे दौड़ना नहीं पड़ता। आज किसान समझ पाया कि उसने बहुत ही समझदार सहायक पाया है। वह भी मुस्कुरा कर इत्मीनान से अपने घर सोने चल दिया।

शिक्षा

दोस्तों, यदि मुश्किलों से बचना है, तो यही सही तरीका है। उस मजदूर की तरह पहले से तैयारी करके रखी जाए, ताकि जीवन में आने वाला कोई भी परिवर्तन आपको परेशानी में ना डाल सके। इस तरह आप चिंताओं से भी मुक्त रह कर सुखमय जीवन जी सकेंगे।

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