Holi 2020: अपने प्रेम को पाने के लिए होलिका ने मारा था प्रह्लाद को

नई दिल्ली। होलिका दहन की सबसे लोकप्रिय और विश्वसनीय कहानी प्रह्लाद और उसकी बुआ होलिका से जुड़ी मानी जाती है। भारतीय जनमानस के मन में बसी इस कहानी के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद की हत्या करना चाहता था। वह स्वयं को भगवान मानता था और प्रह्लाद के विष्णु भक्त होने से क्रुद्ध था।

Holi 2020: अपने प्रेम को पाने के लिए होलिका ने मारा था प्रह्लाद को

जब उसके सारे प्रयास बेकार हो गए, तब उसने अपनी बहन होलिका की मदद लेकर प्रह्लाद को अग्नि में जलाकर मारना चाहा। इस पूरे घटना क्रम में होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया। इसके बाद से होलिका दहन की परंपरा शुरू हो गई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होलिका स्वयं प्रह्लाद को नहीं मारना चाहती थी। फिर क्या कारण था कि वह प्रह्लाद को मारने के लिए तैयार हो गई? आइए, जानते हैं-

हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद को मारना चाहता था

यह उस समय की बात है, जब राजा हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने के कई उपाय कर चुका था, पर उसे सफलता नहीं मिली थी। भक्तवत्सल भगवान विष्णु स्वयं अपने प्रिय भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए उद्यत थे। ऐसे में एक दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका उसके पास आई और उसने बताया कि वह राजकुमार इलोजी से प्रेम करती है और उससे विवाह करना चाहती है। हिरण्यकश्यप को इस विवाह से कोई आपत्ति नहीं थी। उसने हामी भर दी और विवाह के लिए फाल्गुन पूर्णिमा का दिन निश्चित हुआ।

बहन होलिका को वरदान प्राप्त था

शादी की तैयारियों के बीच भी हिरण्यकश्यप का मन हर क्षण अपने पुत्र की हत्या करने के प्रयासों में लगा रहता था। ऐसे में उसे याद आया कि उसकी बहन होलिका को वरदान प्राप्त है कि अग्नि उसे नहीं जला सकती। यह बात याद आते ही उसने होलिका को बुला भेजा और उसे कहा कि वह आज रात ही प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ जाए और उसे मार डाले। होलिका ने याद दिलाया कि आज तो उसका विवाह है। इस पर हिरण्यकश्यप ने कहा कि यदि वह प्रह्लाद को मारेगी, तभी यह विवाह कराया जाएगा, अन्यथा नहीं।

प्रह्लाद बच गया और होलिका मारी गई

होलिका राजकुमार इलोजी से बहुत प्रेम करती थी। वह उसके लिए कुछ भी कर सकती थी। इसके साथ ही वह यह भी जानती थी कि उसका भाई बड़ा जिद्दी है और यदि उसकी बात ना मानी गई, तो वह किसी भी हालत में यह विवाह नहीं होने देगा। इस तरह प्रेम में मजबूर होकर होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई। भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका मारी गई।

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