अनेक महत्वपूर्ण व्रत-त्योहारों का माह है आषाढ़, देखें पूरी लिस्ट यहां
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रत्येक माह की कोई न कोई विशेषता बताई गई है। हिंदू पंचांग का पहला माह होता है चैत्र और अंतिम यानी बारहवां माह होता है फाल्गुन। प्रत्येक माह में विशेष व्रत-त्योहार आते हैं और उनके अनुसार जीवनचर्या रखने का विधान बताया गया है। आषाढ़ माह हिंदू परंपरा का चौथा महीना होता है। यह माह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी महीने से वर्षा ऋतु का आरंभ भी होता है और चातुर्मास भी इसी महीने से प्रारंभ होते हैं, जिसमें समस्त शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। इस महीने में अनेक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार भी आते हैं। आषाढ़ माह 6 जून से प्रारंभ होकर 5 जुलाई 2020 तक रहेगा।

आषाढ़ माह के व्रत व त्योहार
- संकट चतुर्थी: आषाढ़ माह में संकट चतुर्थी 8 जून सोमवार को आ रही है। जो लोग पूरे बारह माह की चतुर्थी करते हैं वे इस दिन व्रत रखकर चांद की पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं। यह चतुर्थी धन, संपत्ति, वैभव, सम्मान और उत्तम संतान सुख प्रदान करती है। इस दिन उज्जैन के समय के अनुसार चंद्रोदय रात्रि 9.52 बजे होगा।
- कालाष्टमी: हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है। कालाष्टमी पर भगवान शिव के अवतार काल भैरव की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने और भैरवनाथ की आराधना करने से शुभ फल मिलते हैं। शत्रुओं का नाश होता है और चारों ओर उन्नति होती है। यह व्रत 13 जून शनिवार को आ रहा है।
- योगिनी एकादशी: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान नारायण की पूजा की जाती है। जिससे समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं। योगिनी एकादशी 17 जून बुधवार को है। इस दिन भगवान नारायण को मिश्री का नैवेद्य लगाया जाता है।

6 जून से 5 जुलाई तक रहेगा आषाढ़
- गुरु प्रदोष व्रत: प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। जो व्यक्ति अपने परिवार की खुशहाली, धन-संपदा, संयम, आत्मविश्वास, रोगों से मुक्ति चाहता है, उसे प्रदोष व्रत जरूर करना चाहिए। 18 जून गुरुवार को प्रदोष व्रत आ रहा है। प्रदोष व्रत वही लोग करते हैं जो पूरे बारह माह के प्रदोष व्रत करने का संकल्प लेते हैं।
- आषाढ़ी अमावस्या: अमावस्या आषाढ़ माह का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। पितरों की शांति के निमित्त इस दिन दान, तर्पण, पिंडदान आदि कार्य किए जाते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य का बड़ा महत्व है। यह अमावस्या 21 जून रविवार को आ रही है। इस दिन खंडग्रास सूर्यग्रहण भी है।
- गुप्त नवरात्रि प्रारंभ: प्रत्येक वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं। जिनमें से दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। चैत्र और आश्विन माह में प्रकट नवरात्रि होती हैं जिन्हें क्रमशः वासंती और शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इनके अलावा दो गुप्त नवरात्रि आती हैं जो माघ और आषाढ़ माह में आती हैं। आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होती है जो 22 जून से 29 जून तक रहेगी। षष्ठी तिथि का क्षय होने के कारण यह नवरात्रि 8 दिनों की रहेगी। गुप्त नवरात्रियां शक्ति की साधनाएं करने के लिए सबसे सिद्ध दिन होते हैं।
- जगन्नाथ रथ यात्रा: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है। इसमें भगवान श्री कृष्ण, माता सुभद्रा व बलराम को रथ में विराजित करके यात्रा निकाली जाती है। यह यात्रा पुष्य नक्षत्र में निकाली जाती है। इस माह जगन्नाथ रथ यात्रा 23 जून मंगलवार को निकाली जाएगी।

इस महीने हैं कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार
- भड़ली नवमी: आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी के दिन से विवाह कार्य बंद हो जाते हैं। इससे पहले विवाह का अंतिम शुभ मुहूर्त भड़ली नवमी होता है। यह नवमी 29 जून सोमवार को है। इस दिन गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है।
- देवशयनी एकादशी: देवशयनी एकादशी वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी होती है। इस एकादशी के दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए शयनकाल में चले जाते हैं। इसलिए समस्त मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इन चार माह में सृष्टि का कार्यभार शिव परिवार पर रहता है। यह एकादशी 1 जुलाई बुधवार को आ रही है। इस दिन भगवान विष्णु को दाख का नैवेद्य लगाया जाता है।
- आषाढ़ी पूर्णिमा: आषाढ़ी अमावस्या की तरह आषाढ़ी पूर्णिमा भी इस माह का सबसे खास दिन होता है। धर्म-कर्म, दान-पुण्य के लिए यह माह बहुत महत्व रखता है। इस दिन को गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा आदि के रूप में भी मनाया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा 5 जुलाई रविवार को आ रही है।

आषाढ़ माह के अन्य महत्वपूर्ण दिन
- 9 जून: शुक्र का उदय पूर्व दिशा में
- 10 जून: पंचक प्रारंभ
- 14 जून: सूर्य मिथुन राशि में
- 15 जून: पंचक समाप्त
- 18 जून: बुध वक्री, मंगल मीन राशि में
- 25 जून: शुक्र मार्गी
- 26 जून: कुमार षष्ठी
- 27 जून: विवस्वत सप्तमी
- 28 जून: दुर्गा अष्टमी
- 2 जुलाई: प्रदोष व्रत












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