पति के सुख, शांति और समृद्धि के लिए होती है 'हरतालिका तीज'

भारत परंपराओं का देश है, प्यार, श्रद्धा और समर्पण के इस देश में व्रत और पूजा-पाठ भी सच्चे और पवित्र प्रेम की कहानी कहते हैं। जिसका ताजा प्रमाण है हरतालिका तीज। जिसको लेकर विवाहित महिलाओं और कुंवारी कन्याओं में काफी उत्साह है। इस मौके पर उनमें सजने-संवरने की होड़-सी मची है। यही कारण है कि बाजारों से लेकर ब्यूटी पार्लर तक में काफी भीड़ देखी जा रही है।

सजना है मुझे सजना के लिए

हरतालिका तीज पर्व गुरूवार को है। इस पर्व पर विवाहिताएं पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं, वहीं बालिकाएं अच्छे वर की कामना के साथ इस पूजन में हिस्सा लेती हैं। मान्यता है कि पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए यह व्रत रखा था। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश दत्त त्रिपाठी बताते हैं कि इस व्रत पर पूजन की विशेष विधि है। दिन भर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के वक्त शिवजी की पूजा करके पति के हाथों व्रत तोड़ती है और कुछ महिलाएं तो 24 घंटे तक बिना पानी के रहती हैं। कहते हैं कि गणेश,भगवान शिव व गौरी की पूजा से सुखमय जीवन, सुखद परिवार व पति के कष्ट का विनाश होता है।

सलामत रहे मोरा पिया... मोरा पिया...

पति की सलामती और तरक्की के लिए पत्नियों की ओर से रखे जाना वाला यह व्रत पत्नी के प्यार और समर्पण का सच्चा प्रमाण है वरना कोई किसी के लिए सुबह से शाम तक कैसे और क्यों बिना पानी के एक बूंद के रह सकता है। महिलाएं इस व्रत का बेसब्री से इंतजार करती हैं।

सुबह चार बजे उठकर महिलाएं सरगी खाती हैं और उसके बाद पूरे दिन बिना पानी के रहती हैं। शाम को पूजा करने के बाद चांद देखकर अपनी पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं।

एक नजर डालते हैं हरितालिका पूजन और उसके महत्व पर...

'श्रावणी तीज'

'श्रावणी तीज'

वैसे तो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को भी तीज मनाई जाती है, जिसे छोटी तीज या 'श्रावणी तीज' कहा जाता है।

हरितालिका तीज

हरितालिका तीज

भादो माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले पर्व को बड़ी तीज तथा हरितालिका तीज कहा जाता है।

भगवान शिव-पर्वती की मूर्ति

भगवान शिव-पर्वती की मूर्ति

इस व्रत में महिलाएं सुबह उपवास रखकर रात में मिट्टी से भगवान शिव-पर्वती की मूर्ति बनाकर पूजा-अर्चना करती हैं और पति के दीर्घायु की कामना करती हैं।

पिडुकिया (गुजिया) चढ़ाने की परंपरा

पिडुकिया (गुजिया) चढ़ाने की परंपरा

इस व्रत पर वैसे तो भोग लगाने के लिए कई पकवान बनते हैं, लेकिन भगवान को प्रसाद के रूप में पिडुकिया (गुजिया) चढ़ाने की पुरानी परंपरा रही है। पिडुकिया मैदे से बनती है,जिसमें खोवा, सूजी, नारियल और बेसन भरा जाता है।

सुहागिन और कुंवारी दोनों ही रखती हैं व्रत

सुहागिन और कुंवारी दोनों ही रखती हैं व्रत

"सुहागिन महिलाओं के साथ कुंवारी कन्याओं के लिए भी यह दिन बेहद शुभ होता है। इस दिन सुहागिनों ने पति के दीर्घायु होने, सुखद वैवाहिक जीवन, संपन्न्ता और पुत्र प्राप्ति की कामना को लेकर व्रत रखती हैं तो कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।"

भगवान शिव मे मां पार्वती को पत्नी माना था

भगवान शिव मे मां पार्वती को पत्नी माना था

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने इसी दिन उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

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