Ekadashi Vrat Katha: पापमोचिनी एकादशी आज, पढ़ें कथा और कीजिए आरती मिलेगा पुण्य
Ekadashi vrat katha: आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे कि पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है, इसके नाम में ही इसके महत्व की बातें स्पष्ट हैं। ये एकादशी हर तरह के पापों से मुक्ति दिलाती है और मान्यता है कि इसका व्रत जो कोई भी करता है, उसे मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आज के दिन भक्तजन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत कथा का वाचन और आरती करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से इंसान के घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

आज सभी को पूजा के वक्त एकादशी की कथा सुननी चाहिए, ऐसा करने से से परिवार का हर सदस्य सुखी और प्रसन्न रहता है।
एकादशी व्रत कथा (Ekadashi Vrat Katha)
प्राचीन काल में महिष्मति नगर में राजा रुक्मांगद का राज्य था। वे बड़े ही धर्मपरायण और विष्णु भक्त थे। वे नियमित रूप से एकादशी व्रत का पालन करते थे ।एक दिन, स्वर्ग के देवताओं ने राजा की भक्ति देखकर भगवान विष्णु से कहा कि इस राजा की परीक्षा ली जाए।
भगवान ने अप्सरा मोहिनी को पृथ्वी पर भेजा। मोहिनी के सौंदर्य से मोहित होकर राजा उसके प्रति आकर्षित हो गए। मोहिनी ने राजा से विवाह की इच्छा जताई, लेकिन एक शर्त रखी कि राजा को एकादशी व्रत का पालन छोड़ना होगा।
सच्ची भक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति है (Ekadashi Vrat Katha)
राजा धर्म संकट में पड़ गए। वे सोचने लगे कि यदि वे व्रत छोड़ देते हैं तो भगवान विष्णु नाराज हो जाएंगे और यदि वे मोहिनी की शर्त नहीं मानते तो वह क्रोधित हो सकती है। अंततः राजा ने धर्म का पालन करते हुए व्रत का त्याग नहीं किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए और राजा को आशीर्वाद दिया। उन्होंने मोहिनी को भी बताया कि सच्ची भक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति है।
एकादशी व्रत विधि ( Ekadashi Vrat Katha)
- प्रातः स्नान कर, स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीप जलाएं।
- भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, तुलसी पत्ता और पंचामृत अर्पित करें।
व्रत के दिन मन, वचन, कर्म से पवित्र रहें
- पूरे दिन फलाहार करें और मन, वचन, कर्म से पवित्र रहें।
- शाम को एकादशी व्रत कथा सुनें और आरती करें।
- अगले दिन द्वादशी को ब्राह्मण को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।
एकादशी व्रत की आरती (Ekadashi vrat aarti)
- ॐ जय जगदीश हरे
- स्वामी जय जगदीश हरे
- भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट
- क्षण में दूर करे
- ॐ जय जगदीश हरे
- ॐ जय जगदीश हरे
- स्वामी जय जगदीश हरे
- भक्त ज़नो के संकट दास ज़नो के संकट
- क्षण में दूर करे
- ॐ जय जगदीश हरे
- जो ध्यावे फल पावे दुःख बिन से मन का
- स्वामी दुख बिन से मन का
- सुख सम्पति घर आवे
- सुख सम्पति घर आवे
- कष्ट मिटे तन का
- ॐ जय जगदीश हरे
- मात पिता तुम मेरे
- शरण गहूं किसकी
- स्वामी शरण गहूं किसकी
- तुम बिन और ना दूजा
- तुम बिन और ना दूजा
- आस करूँ जिसकी
- ॐ जय जगदीश हरे
- तुम पूरण परमात्मा
- तुम अंतरियामी
- स्वामी तुम अंतरियामी
- पार ब्रह्म परमेश्वर
- पार ब्रह्म परमेश्वर
- तुम सबके स्वामी
- ॐ जय जगदीश हरे
- तुम करुणा के सागर
- तुम पालन करता
- स्वामी तुम पालन करता
- मैं मूरख खलकामी
- मैं सेवक तुम स्वामी
- कृपा करो भर्ता
- ॐ जय जगदीश हरे
- तुम हो एक अगोचर
- सबके प्राण पति
- स्वामी सबके प्राण पति
- किस विध मिलु दयामय
- किस विध मिलु दयामय
- तुम को मैं कुमति
- ॐ जय जगदीश हरे
- दीन बन्धु दुःख हर्ता
- ठाकुर तुम मेरे
- स्वामी रक्षक तुम मेरे
- अपने हाथ उठाओ
- अपनी शरण लगाओ
- द्वार पड़ा तेरे
- ॐ जय जगदीश हरे
- विषय-विकार मिटाओ पाप हरो देवा
- स्वामी पाप हरो देवा
- श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
- श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
- सन्तन की सेवा
- ॐ जय जगदीश हरे
- ओम जय जगदीश हरे
- स्वामी जय जगदीश हरे
- भक्त ज़नो के संकट
- दास ज़नो के संकट
- क्षण में दूर करे
- ॐ जय जगदीश हरे
- ॐ जय जगदीश हरे
- स्वामी जय जगदीश हरे
- भक्त ज़नो के संकट
- दास जनो के संकट
- क्षण में दूर करे
- ॐ जय जगदीश हरे।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बातें करें।












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