Easter 2018: आज ही के दिन फिर से जीवित हो गए थे प्रभु यीशु
नई दिल्ली। आज पूरी दुनिया में ईस्टर का त्योहार मनाया जा रहा है। यह ईसाइयों का एक महत्वपूर्ण पर्व है। ईसाई धर्म के मानने वालों का विश्वास है कि 'गुड फ्राइडे' के तीसरे दिन यानी उसके अगले संडे को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे। उनके दोबारा जीवित होने की इस घटना को ईसाई धर्म के लोग ईस्टर संडे के रूप में मनाते हैं।

'ईस्टर' का मतलब
'ईस्टर' का मतलब ईस्टर शब्द की उत्पत्ति जर्मन के "ईओस्टर" शब्द से हुई हैं जिसका अर्थ देवी हैं। इसे ईसाई समुदाय के लोग वसंत की देवी तथा उर्वरता की देवी मानते हैं। जिससे प्रसन्न करने के लिए अप्रैल माह में उत्सव भी होते हैं।

ईस्टर काल चालीस दिनों का होता है
'ईस्टर' को चर्च के वर्ष का काल या 'ईस्टर काल' या 'द ईस्टर सीज़न' भी कहा जाता है। परंपरागत रूप से ईस्टर काल चालीस दिनों का होता है।ईस्टर सीज़न या ईस्टर काल के पहले सप्ताह को ईस्टर सप्ताह या ईस्टर अष्टक या ओक्टेव ऑफ़ ईस्टर कहते हैं। इस काल को उपवास, प्रार्थना और प्रायश्चित करने के लिए माना जाता है।

कहानी
येरुशलम के पहाड़ पर रोमन गवर्नर ने ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। ऐसा माना जाता हैं कि यीशु की मौत होने के बाद इनके शव को कब्र में दफना दिया गया था। लेकिन मृत्यु के तीन दिन बाद रविवार के दिन ईसा मसीह कब्र में से जीवित हो उठे थे। कहा जाता है कि आज भी यीशु की कब्र खुली हुई हैं। ईसा मसीह ने जीवित होने के बाद अपने शिष्यों के साथ 40 दिन रहकर हजारों लोगों को अपने दर्शन दिए थे।

ईसाई समुदाय
ईस्टर संडे के दिन ईसाई समुदाय के लोग गिरजाघरों में इकट्ठा होकर जीवित प्रभु की आराधना (उपासना) स्तुति करते हैं और ईसा मसीह के जी उठने की खुशी में प्रभु भोज में भाग लेते हैं। एक-दूसरे को प्रभु ईशु के नाम पर शुभकामनाएं देकर भाईचारे और स्नेह का प्रतीक मानकर इस दिन को मनाते है।












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